बलौदाबाजार जिले के कसडोल थाना क्षेत्र स्थित खरवे गांव में तीन महीने के भीतर हुई 8 संदिग्ध मौतों के मामले ने नया मोड़ ले लिया है। ग्रामीणों की शिकायतों और बढ़ते संदेह के बीच प्रशासन ने मृतकों के शव कब्र से निकलवाकर दोबारा पोस्टमॉर्टम कराने का फैसला किया है। इसी कड़ी में छह शवों को रायपुर स्थित डॉ. भीमराव अंबेडकर स्मृति चिकित्सालय (मेकाहारा) लाया गया, जहां विशेषज्ञों की निगरानी में उनका परीक्षण किया जा रहा है।
मौतों के कारणों की तलाश में दोबारा जांच
अधिकारियों के मुताबिक, पोस्टमॉर्टम के दौरान आवश्यक नमूने और विसरा सुरक्षित रखकर फॉरेंसिक जांच के लिए भेजे जाएंगे। रिपोर्ट मिलने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि मौतों के पीछे किसी जहरीले पदार्थ का सेवन था या कोई अन्य कारण जिम्मेदार था। फिलहाल पुलिस जांच पूरी होने तक किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से बच रही है।
तीन महीनों में 8 मौतों से दहशत
खरवे गांव में संदिग्ध मौतों का सिलसिला फरवरी से शुरू हुआ था। 6 फरवरी को बद्री पटेल की मौत के बाद एक-एक कर कई लोगों ने दम तोड़ दिया। फरवरी, मार्च, अप्रैल और मई के बीच कुल आठ लोगों की मौत होने से ग्रामीणों में भय और चिंता का माहौल बन गया। लगातार हो रही मौतों के बाद बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने पुलिस से मामले की गहन जांच की मांग की थी।
एक ग्रामीण पर संदेह, पुलिस कर रही जांच
ग्रामीणों का आरोप है कि जिन लोगों की मौत हुई, उनका किसी न किसी रूप में गांव के ही रामसाय जायसवाल से संपर्क रहा था। कुछ लोगों के साथ शराब पीने या शराब से जुड़े अन्य प्रसंगों का भी जिक्र किया जा रहा है। हालांकि, इन आरोपों की अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और पुलिस सभी पहलुओं की जांच कर रही है।
खजाने और बलि की चर्चाओं से बढ़ी सनसनी
गांव में यह चर्चा भी है कि कथित रूप से जमीन में गड़े खजाने को हासिल करने के लिए मानव बलि जैसी घटनाएं हो सकती हैं। हालांकि प्रशासन और पुलिस ने ऐसी किसी भी बात की पुष्टि नहीं की है। अधिकारियों का कहना है कि वैज्ञानिक जांच और फॉरेंसिक रिपोर्ट के आधार पर ही मामले की वास्तविक तस्वीर सामने आएगी।
फिलहाल पूरे मामले पर पुलिस, प्रशासन और फॉरेंसिक विशेषज्ञों की नजर बनी हुई है। अब सभी की निगाहें पोस्टमॉर्टम और जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे इन रहस्यमयी मौतों का सच सामने आ सके।