भोपाल। मध्य प्रदेश में प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने बड़ा फेरबदल किया है। देर रात जारी तबादला आदेश के तहत 23 आईएएस अधिकारियों की जिम्मेदारियों में बदलाव किया गया है। इस सूची में 11 जिलों के कलेक्टर भी शामिल हैं। वरिष्ठ आईएएस अधिकारी सुखबीर सिंह को मुख्यमंत्री का प्रमुख सचिव बनाया गया है, जबकि रश्मि अरुण शमी को लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग में अपर मुख्य सचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई है। तबादला सूची में हरदा, नर्मदापुरम, पन्ना, बालाघाट, जबलपुर, सिंगरौली और रायसेन समेत कई जिलों के प्रशासनिक नेतृत्व में बदलाव किया गया है। कुछ अधिकारियों को मंत्रालय में नई जिम्मेदारियां दी गई हैं, जबकि कुछ को दोबारा जिला प्रशासन की कमान सौंपी गई है।
MP IAS Transfer List 2026: इन 11 जिलों को मिले नए कलेक्टर
राज्य सरकार के आदेश के अनुसार, निम्नलिखित अधिकारियों को अलग-अलग जिलों में कलेक्टर नियुक्त किया गया है। आईएएस अधिकारी नई पदस्थापना में राजेश कुमार ओगरे मऊगंज कलेक्टर, पवन कुमार जैन भिंड कलेक्टर, अरुण कुमार विश्वकर्मा जबलपुर कलेक्टर, आशीष वशिष्ठ नर्मदापुरम कलेक्टर, अंकित अस्थाना सिंगरौली कलेक्टर, आदित्य सिंह बालाघाट कलेक्टर, हर्ष सिंह पन्ना कलेक्टर, रोहित सिसोनिया रायसेन कलेक्टर, विवेक कुमार बुरहानपुर कलेक्टर, डॉ. परीक्षित झाड़े शाजापुर कलेक्टर, कुमार सत्यम हरदा कलेक्टर शामिल है, इन नियुक्तियों के साथ संबंधित जिलों में प्रशासनिक नेतृत्व की जिम्मेदारी नए अधिकारियों को सौंपी गई है। सरकार के इस कदम से स्थानीय प्रशासन, विकास योजनाओं और जनसमस्याओं के निस्तारण की व्यवस्था पर भी असर पड़ने की संभावना है।
सुखबीर सिंह बने मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव
प्रशासनिक फेरबदल में वरिष्ठ आईएएस अधिकारी सुखबीर सिंह को मुख्यमंत्री कार्यालय में प्रमुख सचिव नियुक्त किया गया है। इसके साथ ही उन्हें लोक निर्माण विभाग (PWD) के प्रमुख सचिव का अतिरिक्त दायित्व भी दिया गया है। इस नियुक्ति को मंत्रालय और मुख्यमंत्री कार्यालय के बीच प्रशासनिक समन्वय की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वहीं, वरिष्ठ आईएएस अधिकारी रश्मि अरुण शमी को लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग में अपर मुख्य सचिव बनाया गया है। उनके पास भोपाल गैस त्रासदी राहत एवं पुनर्वास तथा खाद्य सुरक्षा से संबंधित अतिरिक्त जिम्मेदारियां भी रहेंगी।
हरदा और नर्मदापुरम के कलेक्टरों का भी तबादला
तबादला आदेश में हरदा के कलेक्टर सिद्धार्थ जैन और नर्मदापुरम के कलेक्टर सोमेश मिश्रा की जगह नए अधिकारियों को जिम्मेदारी दी गई है। कुमार सत्यम को हरदा और आशीष वशिष्ठ को नर्मदापुरम का कलेक्टर बनाया गया है। दोनों जिलों में मूंग खरीदी से जुड़े किसान आंदोलन और प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर सवाल उठने की चर्चा रही है। हालांकि, अधिकारियों के तबादले के पीछे के सभी कारणों को सरकार के आधिकारिक आदेश या संबंधित विभाग की पुष्टि के आधार पर ही अंतिम रूप से माना जाना चाहिए।
पन्ना में केन-बेतवा परियोजना, बालाघाट में स्वास्थ्य सेवाओं पर नजर
पन्ना जिले में केन-बेतवा लिंक परियोजना से जुड़े भू-अर्जन के मुद्दे महत्वपूर्ण हैं। यहां हर्ष सिंह को कलेक्टर की जिम्मेदारी सौंपी गई है। पूर्व कलेक्टर ऊषा परमार को उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग में अपर सचिव बनाया गया है। दूसरी ओर, बालाघाट में स्वास्थ्य सेवाओं से संबंधित चुनौतियों के बीच आदित्य सिंह को नया कलेक्टर नियुक्त किया गया है। सरकार के इस प्रशासनिक बदलाव के बाद इन जिलों में विकास कार्यों, जनहित से जुड़े मुद्दों और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन पर विशेष ध्यान रहने की उम्मीद है।
मंत्रालय में भी बदलीं अधिकारियों की जिम्मेदारियां
जिला स्तर पर बदलावों के साथ राज्य मंत्रालय में भी कई अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।
राघवेन्द्र सिंह: कृषि विपणन बोर्ड के प्रबंध संचालक की जिम्मेदारी।
संदीप केरकेट्टा: इंदौर विकास प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) नियुक्त।
भरत यादव: मध्य प्रदेश सड़क विकास निगम के प्रबंध संचालक के साथ जनसंपर्क विभाग का अतिरिक्त प्रभार।
जॉन किंग्स्ली एआर: सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) विभाग में सचिव की जिम्मेदारी।
इसके अतिरिक्त कई वरिष्ठ अधिकारियों को विभागीय और अतिरिक्त प्रभार सौंपे गए हैं। इन बदलावों का उद्देश्य विभिन्न विभागों के कामकाज और प्रशासनिक समन्वय को व्यवस्थित करना बताया जा रहा है।
पहली बार जिला कलेक्टर बने राजेश कुमार ओगरे
तबादला सूची में राजेश कुमार ओगरे को मऊगंज जिले का कलेक्टर बनाया गया है। यह उनके लिए जिला प्रशासन के नेतृत्व की नई जिम्मेदारी है। वहीं, आदित्य सिंह और रोहित सिसोनिया को भी कलेक्टर के रूप में नई पदस्थापना मिली है। कुल मिलाकर मध्य प्रदेश में हुए इस प्रशासनिक फेरबदल में वरिष्ठ अधिकारियों से लेकर जिला प्रशासन तक जिम्मेदारियों का पुनर्वितरण किया गया है। अब संबंधित जिलों में नए कलेक्टरों के सामने विकास योजनाओं को गति देने, जनसमस्याओं के समाधान और सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन की चुनौती होगी।