छत्तीसगढ़ में महिलाओं और लड़कियों की गुमशुदगी का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है। गृह विभाग से सामने आए आंकड़ों ने यह चिंता और गहरा दी है कि प्रदेश के कई जिलों में बड़ी संख्या में महिलाएं लापता हुईं, लेकिन उनमें से हजारों का अब तक कोई ठोस पता नहीं चल पाया है। सबसे ज्यादा चिंता की बात यह है कि राजधानी रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग और बलौदाबाजार जैसे जिलों में महिलाओं के गुमशुदा होने की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। इन मामलों ने न केवल पुलिस व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि महिला सुरक्षा को लेकर भी बड़ी बहस छेड़ दी है।
आंकड़े बताते हैं कि वर्ष 2023 से 31 जनवरी 2026 तक चार प्रमुख जिलों में 7188 महिलाएं गुमशुदा दर्ज की गईं। इनमें रायपुर में 5481, बिलासपुर में 3208, दुर्ग में 2565 और बलौदाबाजार में 1922 महिलाओं के लापता होने के मामले सामने आए। इसी अवधि में लड़कियों के गायब होने के आंकड़े भी कम नहीं रहे। रायपुर से 1243, बिलासपुर से 1086, दुर्ग से 752 और बलौदाबाजार से 699 लड़कियां लापता हुईं। इन आंकड़ों ने प्रदेश में महिलाओं और किशोरियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
रायपुर में सबसे ज्यादा गंभीर स्थिति
राजधानी रायपुर में महिलाओं और लड़कियों की गुमशुदगी का ग्राफ सबसे अधिक चिंताजनक नजर आ रहा है। यहां बीते तीन वर्षों में बड़ी संख्या में युवतियां और महिलाएं गायब हुई हैं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक वर्ष 2023 में 355 लड़कियां लापता हुईं, वर्ष 2024 में यह संख्या 410 तक पहुंच गई और वर्ष 2025 में 478 लड़कियों की गुमशुदगी दर्ज की गई। वर्ष 2026 में 31 जनवरी तक 49 लड़कियों के गायब होने की जानकारी थानों तक पहुंच चुकी थी।
महिलाओं की स्थिति और भी ज्यादा गंभीर है। रायपुर में वर्ष 2023 में 1590 महिलाएं लापता हुईं। वर्ष 2024 में यह आंकड़ा बढ़कर 1726 तक पहुंच गया। वर्ष 2025 में 1982 महिलाओं के गुमशुदा होने की सूचना दर्ज हुई। वहीं वर्ष 2026 में जनवरी के अंत तक 183 महिलाएं लापता दर्ज की गईं। हालांकि इनमें से कई को पुलिस ने खोज निकाला, लेकिन लगातार बढ़ती संख्या यह बताती है कि राजधानी में यह समस्या तेजी से गहराती जा रही है।
बिलासपुर में भी कम नहीं है हालात की गंभीरता
बिलासपुर में भी महिलाओं और लड़कियों की गुमशुदगी के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। वर्ष 2023 में 895 महिलाएं लापता हुई थीं, जिनमें से 737 को पुलिस ने खोज लिया, लेकिन 158 महिलाओं का अब तक कोई स्पष्ट पता नहीं चल पाया। इसी दौरान 341 लड़कियां भी गुमशुदा हुईं, जिनमें से 327 को पुलिस वापस लाने में सफल रही।
वर्ष 2024 में बिलासपुर जिले में 1033 महिलाओं के लापता होने की सूचना दर्ज हुई। इनमें से 813 महिलाओं के बारे में पुलिस को जानकारी मिली, लेकिन 220 का अब तक कोई ठोस पता नहीं चल सका। इसी साल 358 लड़कियां भी गायब हुईं, जिनमें से 327 को तलाश लिया गया। वर्ष 2025 में जिले से 1171 महिलाएं लापता हुईं और 359 लड़कियां भी गुमशुदा रहीं। यह ट्रेंड बताता है कि बिलासपुर में भी गुमशुदगी की घटनाएं लगातार बनी हुई हैं और कई मामलों में अब तक पूरी सफलता नहीं मिल पाई है।
दुर्ग और बलौदाबाजार में भी बढ़ी चिंता
रिपोर्ट के मुताबिक दुर्ग जिले में इस अवधि के दौरान 2565 महिलाओं और 752 लड़कियों की गुमशुदगी दर्ज की गई। वहीं बलौदाबाजार में 1922 महिलाएं और 699 लड़कियां लापता हुईं। इन जिलों में भी महिलाओं के गुमशुदा होने के मामले लड़कियों की तुलना में कहीं ज्यादा हैं। इससे यह साफ होता है कि समस्या सिर्फ किशोरियों तक सीमित नहीं, बल्कि बड़ी संख्या में वयस्क महिलाएं भी लापता हो रही हैं।
इन आंकड़ों ने यह संकेत दिया है कि प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर चुनौती मौजूद है। पुलिस को हर जिले में अलग-अलग सामाजिक, पारिवारिक और आपराधिक कारणों की जांच करनी पड़ रही है, लेकिन इसके बावजूद कई मामलों का अब तक समाधान नहीं हो पाया है।
गुमशुदगी के पीछे कई संभावित कारण
महिलाओं और लड़कियों के गायब होने के मामलों के पीछे अलग-अलग वजहें सामने आती रही हैं। कई मामलों में बहला-फुसलाकर ले जाने की बात सामने आती है। कुछ मामलों में पारिवारिक विवाद, प्रेम संबंध, नौकरी या बेहतर जीवन के झांसे जैसे कारण भी जुड़ते हैं। वहीं कुछ प्रकरणों में गंभीर आपराधिक आशंकाएं भी जताई जाती हैं।
आमतौर पर पुलिस शुरुआती स्तर पर गुमशुदगी का मामला दर्ज करती है। बाद में यदि जांच में अपहरण, बहला-फुसलाकर ले जाने या किसी आपराधिक साजिश की पुष्टि होती है, तब संबंधित धाराएं जोड़ी जाती हैं। यही वजह है कि शुरुआती जांच की दिशा और तेजी बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।
पुलिस के सामने बड़ी चुनौती
इन मामलों में पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती समय पर खोजबीन और सही एंगल से जांच करना है। कई बार गुमशुदगी के मामलों में शुरुआती घंटे बेहद अहम होते हैं। यदि उसी दौरान सुराग नहीं मिलता, तो जांच लंबी और जटिल हो जाती है। बड़े शहरों में बढ़ती आबादी, सीमावर्ती आवाजाही, सोशल मीडिया संपर्क और झांसा देकर ले जाने जैसे नए तरीकों ने पुलिस की चुनौती को और बढ़ा दिया है।
रायपुर और बिलासपुर जैसे शहरों में लगातार बढ़ती गुमशुदगी ने यह सवाल भी खड़ा किया है कि क्या मौजूदा तंत्र इन मामलों से निपटने के लिए पर्याप्त है या फिर अलग और ज्यादा मजबूत ट्रैकिंग सिस्टम की जरूरत है।