MP Congress: मध्यप्रदेश से राज्यसभा की सुरक्षित सीट को बिना चुनाव लड़े ही BJP की झोली में परोसने के मामले में कांग्रेस आलाकमान अब आर-पार के मूड में नजर आ रहा है। सूत्रों से मिली खबर के मुताबिक, कांग्रेस केंद्रीय नेतृत्व ने मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र खारिज होने के पूरे घटनाक्रम की समीक्षा कराने का फैसला किया है।
प्रदेश नेतृत्व से नाराज हाईकमान!
इस लापरवाही को लेकर दिल्ली दरबार मध्य प्रदेश कांग्रेस के पीसीसी अध्यक्ष जीतू पटवारी, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार और प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी की कार्यशैली से खफा है। सूत्रों का कहना है कि इस चूक की समीक्षा के बाद प्रदेश संगठन में बड़े बदलाव करने पर मंथन कर सकता है।
क्यों नही ली विशेषज्ञों से राय?
कांग्रेस कार्यसमिति से आ रही खबरों के अनुसार केंद्रीय नेतृत्व इस बात को लेकर सबसे ज्यादा नाराज है कि जब उम्मीदवार का चयन समय रहते कर लिया गया था, तो इतनी बड़ी चूक कैसे हुई। मीनाक्षी नटराजन के नाम की घोषणा राज्यसभा नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख से पूरे चार दिन पहले ही आधिकारिक तौर पर कर दी गई थी। इसके बावजूद प्रदेश संगठन ने फॉर्म भरने से पहले विशेषज्ञों से स्क्रूटनी कराने या राय क्यों नही ली गई।
कमजोर समन्वय की खुली पोल
दिल्ली में हुई बैठक में यह बात खुलकर सामने आई है कि इस पूरे एपिसोड के दौरान पीसीसी मुख्यालय, नेता प्रतिपक्ष कार्यालय और एआईसीसी प्रभारियों के बीच आपसी समन्वय कमजोर रहा। कोई भी बड़ा नेता फॉर्म को री-चेक करने की जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं था। आलाकमान का स्पष्ट मानना है कि यह केवल एक गलती नहीं है, बल्कि एक बड़ी चूक है। जिसने पूरे देश में कांग्रेस की किरकिरी कराई है। जीतू पटवारी, उमंग सिंघार और हरीश चौधरी को इस बात का जवाब देना होगा कि इतनी बड़ी चूक को समय रहते क्यों नहीं पकड़ा गया।
सियासी गलियारों में सुगबुगाहट
भोपाल से लेकर दिल्ली के सत्ता गलियारों में चर्चाओं का दौर है कि समीक्षा रिपोर्ट के सामने आते ही मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के पद और पीसीसी संगठन में सर्जिकल स्ट्राइक होना तय है।
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