MP Congress: मध्यप्रदेश राज्यसभा चुनाव की तीसरी सीट का विवाद अब पूरी तरह देश की सर्वोच्च अदालत के पाले में पहुंच चुका है। रिटर्निंग ऑफिसर द्वारा नामांकन फॉर्म निरस्त किए जाने के फैसले के खिलाफ कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। गुरुवार, 11 जून को अदालत में हुई सुनवाई के दौरान कांग्रेस को बड़ा झटका लगा, जब सुप्रीम कोर्ट ने भाजपा प्रत्याशी महेश केवट के निर्विरोध निर्वाचन के नतीजों की घोषणा पर कोई भी अंतरिम रोक लगाने से साफ इनकार कर दिया। हालांकि, अदालत कांग्रेस की मुख्य याचिका पर विस्तार से सुनवाई करने के लिए पूरी तरह सहमत हो गई है और अब इस बेहद संवेदनशील मामले की अगली सुनवाई कल होगी।
सुप्रीम कोर्ट में सिंघवी की दलील
देश के दिग्गज और कांग्रेस के वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने सुप्रीम कोर्ट में मीनाक्षी नटराजन का पक्ष रखते हुए कड़े तर्क दिए। सिंघवी ने अदालत के समक्ष दलील दी कि आज 11 जून की शाम को नाम वापसी की समय-सीमा समाप्त हो रही है। ऐसे में निर्वाचन आयोग किसी भी समय भाजपा उम्मीदवार को निर्विरोध निर्वाचित घोषित करने का सर्टिफिकेट जारी कर सकता है। इसलिए जब तक याचिका पर अंतिम फैसला नहीं आता, तब तक नतीजों की घोषणा पर तुरंत अंतरिम रोक लगाई जानी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने सिंघवी की तात्कालिक दलीलों को सुनने के बाद भी आदेश जारी करने में कोई जल्दबाजी नहीं दिखाई। अदालत ने कहा कि वे इस मामले के सभी कानूनी और तकनीकी पहलुओं को पूरी तरह परखने के बाद ही कोई निर्णय देंगे और इसके लिए कल का दिन तय किया गया है।
गरजे नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार
इधर, दिल्ली में राहत न मिलने के बाद भोपाल में कांग्रेस खेमे में भारी छटपटाहट देखी गई। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाकर केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर हमला बोला है। उमंग सिंघार ने पक्षपात का आरोप लगाते हुए कहा कि, यह कैसी दोहरी नीति है? झारखंड के एक ऐसे ही मामले में चुनाव आयोग ने भाजपा के उम्मीदवार के फॉर्म को वैध घोषित कर दिया था, लेकिन जब बात मध्य प्रदेश में मीनाक्षी नटराजन की आई, तो आयोग ने हमारे पक्ष को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया। चुनाव आयोग अब निष्पक्ष संस्था नहीं रहा, वह पूरी तरह से बीजेपी के एजेंट की तरह काम कर रहा है।
न्याय में देरी पर उठाए सवाल
सिंघवी और कांग्रेस लीगल टीम की तारीफ करते हुए सिंघार ने न्यायपालिका के रवैये पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा, देश में जब बड़े राजनैतिक मामलों के लिए रात में भी सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे खुल सकते हैं, तो फिर इस लोकतंत्र की हत्या के खिलाफ न्याय देने में इतनी देरी क्यों की जा रही है? हमें पूरा विश्वास है कि कल सुप्रीम कोर्ट दूध का दूध और पानी का पानी करेगा, लेकिन यह फैसला आज ही आ जाना चाहिए था, क्योंकि आज शाम को बीजेपी इस सीट को अनैतिक रूप से हड़प लेगी। नेता प्रतिपक्ष ने अंत में आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी ने देश की सभी संवैधानिक संस्थाओं की स्वायत्तता खत्म कर दी है और उन्हें अपने व्यक्तिगत 'रबर स्टैम्प' की तरह इस्तेमाल कर रही है।
11 जून की शाम पर टिकीं निगाहें
कानूनी जानकारों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा अंतरिम रोक न लगाए जाने के कारण अब तकनीकी तौर पर भाजपा के महेश केवट की निर्विरोध जीत की घोषणा का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है। यदि 11 जून की शाम को निर्वाचन अधिकारी महेश केवट को जीत का प्रमाण पत्र सौंप देते हैं और कल सुप्रीम कोर्ट कांग्रेस की दलीलों को सही मानकर रिटर्निंग ऑफिसर के फैसले को पलट देता है, तो मध्य प्रदेश में एक संकट खड़ा हो जाएगा। ऐसी स्थिति में क्या महेश केवट का निर्वाचन रद्द कर दोबारा वोटिंग कराई जाएगी? यह एक ऐसा पेचीदा सवाल है जिसका जवाब अब सिर्फ और सिर्फ सुप्रीम कोर्ट की चौखट से ही मिल सकता है।