पश्चिम एशिया में जारी तनाव और युद्ध की स्थिति के बीच वैश्विक तेल आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई है। इसी बीच ईरान की ओर से स्पष्ट किया गया है कि होर्मुज का समुद्री मार्ग पूरी तरह बंद नहीं किया गया है। हालांकि मौजूदा हालात के कारण कई जहाजों की आवाजाही प्रभावित हो रही है।
ईरान के सर्वोच्च नेता के प्रतिनिधि डॉ. अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने कहा कि ईरान की ओर से इस महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते को बंद करने का कोई फैसला नहीं लिया गया है। उनके अनुसार सुरक्षा परिस्थितियों के कारण कुछ जहाज फिलहाल वहां से गुजर नहीं पा रहे हैं, लेकिन मार्ग पूरी तरह अवरुद्ध नहीं है और कुछ जहाज अभी भी गुजर रहे हैं।
युद्ध रोकने की अपील
उन्होंने कहा कि इस संघर्ष की वजह से दुनिया के कई देशों पर असर पड़ रहा है और आम लोगों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उनके मुताबिक जिस पक्ष ने युद्ध शुरू किया है, उसी को इसे खत्म करने की जिम्मेदारी लेनी चाहिए।
उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की कि वैश्विक नेता मिलकर शांति स्थापित करने के लिए प्रयास करें और युद्ध को जल्द समाप्त करने के लिए पहल करें।
भारत-ईरान रिश्तों पर राजदूत की टिप्पणी
भारत में तैनात ईरान के राजदूत मोहम्मद फथाली ने भारत और ईरान के संबंधों को मजबूत और मित्रता पर आधारित बताया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के हित कई मामलों में एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं और भारत को ईरान एक अहम साझेदार के रूप में देखता है।
राजदूत ने यह भी कहा कि कठिन समय में भारत ने ईरान का साथ दिया है और दोनों देशों के बीच सहयोग की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है।
वैश्विक तेल सप्लाई के लिए अहम है होर्मुज
होर्मुज जलडमरूमध्य को दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में गिना जाता है। वैश्विक स्तर पर बड़ी मात्रा में तेल और गैस की सप्लाई इसी रास्ते से होती है।
इस मार्ग में किसी भी तरह की रुकावट का असर अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है। भारत भी अपने कच्चे तेल का बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से आयात करता है, इसलिए यहां की स्थिति पर भारत समेत कई देशों की नजर बनी हुई है।