कटनी :मध्य प्रदेश सहित देशभर मे नवरात्रि की दशमीं पर बंगाली समाज की महिलाओं ने सिंदूर खेला कर मां दुर्गा को नम आंखों से विदाई दी। साथ ही इस महिलाओं ने एक-दूसरे के गाल व माथे पर सिंदूर लगाकर विधि-विधान से सदियों पुरानी रस्म निभाई।
विजयादशमी पर ससुराल के लिए विदा होती हैं माता
बंगाली समाज की मान्यता के अनुसार, मां दुर्गा इन दिनों अपने मायके आती हैं और विजयादशमी के दिन अपने ससुराल के लिए विदा होती हैं। इसी विदाई से पहले विवाहित महिलाएं मां दुर्गा के चरणों में सिंदूर अर्पित करती हैं और फिर एक-दूसरे को सिंदूर लगाकर इस परंपरा को उत्साह के साथ मनाती हैं। इस कार्यक्रम का आयोजन कटनी शहर के द्वारका भवन में किया गया।
यह परंपरा सुहाग, सुख-समृद्धि और आपसी प्रेम का प्रतीक
लाल सिंदूर से रंगे चेहरे, पारंपरिक परिधान और मां के जयकारों के बीच यहां भक्ति और भावनाओं का अनूठा संगम देखने को मिला। यह परंपरा सुहाग, सुख-समृद्धि और आपसी प्रेम का प्रतीक मानी जाती है।
अगले वर्ष मां के फिर आगमन की उम्मीद
मां दुर्गा की विदाई का यह पल जहां भक्तों की आंखों को नम कर जाता है, वहीं अगले वर्ष मां के फिर आगमन की उम्मीद भी जगा जाता है।
क्या है सिंदूर खेला
सिंदूर खेला के दौरान पहले माता का श्रृंगार किया जाता है। उसके बाद माता को सिंदूर लगाया जाता है। फिर माता की आरती उतारी जाती हैं फिर माता को भोग आदि अर्पित कर सिंदूर खेला शुरू होता है।