नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय के लेडी इर्विन महाविद्यालय में 1 सितंबर 2026 को राजभाषा कार्यान्वयन समिति के तत्वावधान में हिंदी पखवाड़ा समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य हिंदी के प्रति जागरूकता और सम्मान की भावना को मजबूत करना तथा विद्यार्थियों को हिंदी के रचनात्मक और सृजनात्मक प्रयोग के लिए प्रोत्साहित करना रहा। कार्यक्रम में जेन इन्स्पायर फाउंडेशन के सहयोग से विशेष कवि सम्मेलन भी आयोजित किया गया, जिसमें हिंदी साहित्य से जुड़े कई जाने-माने कवियों और रचनाकारों ने अपनी प्रस्तुतियां दीं।
दीप प्रज्वलन से हुई कार्यक्रम की शुरुआत
समारोह का आरंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। इस अवसर पर महाविद्यालय की निदेशक प्रो. नीलिमा अस्थाना, मुख्य अतिथि एवं विशिष्ट वक्ता प्रो. जितेन्द्र कुमार श्रीवास्तव, राजभाषा कार्यान्वयन समिति की संयोजिका प्रो. नीना भाटिया कॉल और सह-संयोजक डॉ. दिवाकर दुबे मौजूद रहे। इसके बाद विद्यार्थियों ने दिल्ली विश्वविद्यालय का कुलगीत प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में हिंदी भाषा के महत्व, उसके वर्तमान स्वरूप और विद्यार्थियों के बीच हिंदी के रचनात्मक उपयोग को लेकर विचार साझा किए गए।
हिंदी पखवाड़े में रचनात्मक गतिविधियों पर जोर
राजभाषा कार्यान्वयन समिति की संयोजिका प्रो. नीना भाटिया कॉल ने हिंदी पखवाड़े के आयोजन की उपयोगिता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि हिंदी पखवाड़े के माध्यम से विद्यार्थियों के लिए विभिन्न प्रतियोगिताएं और रचनात्मक गतिविधियां आयोजित की जानी चाहिए, ताकि उनकी अभिव्यक्ति और सृजनात्मक क्षमता को आगे बढ़ाया जा सके। उन्होंने हिंदी के अधिकाधिक प्रयोग के साथ विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी को भी ऐसे आयोजनों की महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।
डिजिटल दौर में बढ़ रहा हिंदी का विस्तार
महाविद्यालय की निदेशक प्रो. नीलिमा अस्थाना ने अपने संबोधन में डिजिटल युग में हिंदी की बढ़ती पहुंच और प्रासंगिकता पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि हिंदी आज प्रगति की नई उड़ान भर रही है और डिजिटल माध्यमों ने इसके प्रचार-प्रसार को व्यापक बनाया है। उन्होंने कहा कि किसी भी भाषा के विकास के लिए समर्पण और निरंतर प्रयास जरूरी है। हिंदी अब ज्ञान और विज्ञान के क्षेत्र में भी अपनी जगह मजबूत कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि हिंदी के प्रचार-प्रसार और रचनात्मक उपयोग को बढ़ावा देने में लेडी इर्विन महाविद्यालय लगातार महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
हिंदी किसी भाषा की विरोधी नहीं : प्रो. जितेन्द्र कुमार श्रीवास्तव
मुख्य अतिथि एवं विशिष्ट वक्ता प्रो. जितेन्द्र कुमार श्रीवास्तव ने भाषा, ज्ञान और हिंदी के संबंध पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि समाज में अक्सर यह धारणा देखने को मिलती है कि अंग्रेजी ज्ञान की भाषा है, जबकि वास्तव में कोई भी भाषा स्वयं ज्ञान-विज्ञान नहीं होती, बल्कि ज्ञान के आदान-प्रदान का माध्यम होती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि हिंदी किसी दूसरी भाषा के विरोध में नहीं है, बल्कि वह दूसरी भाषाओं के साथ समन्वय स्थापित करने वाली भाषा है।
‘किराए का घर कितना भी अच्छा हो, अपना घर नहीं होता’
प्रो. जितेन्द्र कुमार श्रीवास्तव ने भाषा के प्रति आत्महीनता की भावना से बचने और अपनी भाषा को लेकर स्वाभिमान विकसित करने की जरूरत बताई। उन्होंने अन्य भाषाओं को अपनी भाषा से अधिक महत्व देने की प्रवृत्ति पर उदाहरण देते हुए कहा, “किराए का घर कितना भी अच्छा हो, अपना घर नहीं होता।” इस उदाहरण के जरिए उन्होंने अपनी भाषा के प्रति जुड़ाव, सम्मान और आत्मीयता की भावना को रेखांकित किया।
हिंदी और स्वतंत्रता आंदोलन के संबंध पर भी चर्चा
अपने संबोधन के दौरान उन्होंने हिंदी के विकास और भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के बीच संबंध पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन के दौर में हिंदी का व्यापक विस्तार हुआ और इसी वजह से हिंदी में स्वतंत्रता की चेतना भी स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि हिंदी दिवस को केवल भाषा के उत्सव तक सीमित न रखकर इसे स्वतंत्रता की चेतना से जुड़े अवसर के रूप में भी समझने की जरूरत है।
कवि सम्मेलन में साहित्यिक रंग से सराबोर हुआ समारोह
मुख्य अतिथि के संबोधन के बाद कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण कवि सम्मेलन रहा। इसका शुभारंभ और मंच संचालन अभिषेक तिवारी ने किया। कवि सम्मेलन में प्रो. रहमान मुसव्विर, शारिका मलिक, अभिषेक तिवारी, मनोज सिन्हा, सरिता जैन, अलका सिन्हा, डॉ. इंदु गुप्ता, शाहिद अंजुम, लक्ष्मी शंकर बाजपेयी और ममता किरण सहित कई कवियों एवं रचनाकारों ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं। कवियों की अलग-अलग विषयों और भावों से जुड़ी प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम में मौजूद श्रोताओं को प्रभावित किया। विविध साहित्यिक प्रस्तुतियों से पूरा आयोजन रचनात्मक और साहित्यिक माहौल से भर गया।
डॉ. दिवाकर दुबे ने जताया आभार
कार्यक्रम के समापन अवसर पर राजभाषा कार्यान्वयन समिति के सह-संयोजक डॉ. दिवाकर दुबे ने धन्यवाद ज्ञापित किया। उन्होंने आयोजन को सफल बनाने में योगदान देने वाले अतिथियों, वक्ताओं, कवियों, शिक्षकों, गैर-शिक्षण कर्मचारियों, विद्यार्थियों और आयोजन से जुड़े सभी सदस्यों के प्रति आभार व्यक्त किया। इस तरह लेडी इर्विन महाविद्यालय में आयोजित हिंदी पखवाड़ा समारोह हिंदी भाषा के प्रति जागरूकता, रचनात्मक अभिव्यक्ति और साहित्यिक संवाद को बढ़ावा देने वाला कार्यक्रम रहा।