खरीफ सीजन को ध्यान में रखते हुए रायपुर जिले में यूरिया, डीएपी, पोटाश, एसएसपी और एनपीके उर्वरकों का भंडारण तेजी से किया जा रहा है। इसके बावजूद अब तक कुल भंडारण लक्ष्य के मुकाबले आधे तक भी नहीं पहुंच सका है, जिससे कृषि व्यवस्था पर दबाव बढ़ता दिख रहा है।
75 हजार मीट्रिक टन लक्ष्य, अब तक सिर्फ 28 हजार टन भंडारण
कृषि विभाग से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार जिले में इस वर्ष कुल 75,700 मीट्रिक टन उर्वरक भंडारण का लक्ष्य तय किया गया है। इसके मुकाबले अब तक केवल 28,284 मीट्रिक टन उर्वरक ही गोदामों में पहुंच पाया है। इससे साफ है कि अभी भी बड़ी मात्रा में भंडारण बाकी है।
डीएपी और पोटाश का सबसे कम स्टॉक
उर्वरकवार आंकड़ों के अनुसार यूरिया का लक्ष्य 34,800 मीट्रिक टन है, जिसमें से 14,255 मीट्रिक टन का भंडारण हुआ है। डीएपी का लक्ष्य 19,000 मीट्रिक टन है, जबकि केवल 5,083 मीट्रिक टन उपलब्ध है। पोटाश, एसएसपी और एनपीके का भंडारण भी 50 प्रतिशत के आंकड़े से काफी नीचे है।
अब तक 7,500 मीट्रिक टन का वितरण
जिले में उपलब्ध उर्वरकों का किसानों की मांग के अनुसार वितरण भी जारी है। अब तक कुल 7,504 मीट्रिक टन उर्वरक किसानों को दिया जा चुका है, जिसमें यूरिया, डीएपी, पोटाश, एसएसपी और एनपीके शामिल हैं।
डीएपी पर अधिक निर्भरता नुकसानदायक
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि किसानों को केवल डीएपी पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। इससे मिट्टी की गुणवत्ता पर नकारात्मक असर पड़ सकता है और संतुलन बिगड़ सकता है। बेहतर उत्पादन के लिए सभी उर्वरकों का संतुलित उपयोग जरूरी बताया गया है।
जैविक विकल्पों के उपयोग पर जोर
विशेषज्ञों ने किसानों को नील हरित काई, हरी खाद और जैव उर्वरकों के उपयोग की सलाह दी है। इसके साथ ही नैनो यूरिया और नैनो डीएपी जैसे आधुनिक विकल्पों को अपनाने पर जोर दिया गया है, जो कम मात्रा में अधिक प्रभावी होते हैं और फसल को सीधे पोषण देते हैं।
खरीफ सीजन पर नजर
भंडारण में कमी के चलते आने वाले दिनों में खरीफ सीजन के दौरान उर्वरक आपूर्ति और वितरण व्यवस्था पर दबाव बढ़ सकता है। कृषि विभाग स्थिति को संतुलित करने के लिए लगातार निगरानी कर रहा है।