INH-हरिभूमि द्वारा आयोजित जिला संवाद 2026 का आयोजन जगदलपुर जिले के लालबाग स्थित शौर्य भवन में किया गया। यह कार्यक्रम केवल औपचारिक मंचीय भाषणों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि बस्तर की जमीनी सच्चाई, नक्सल समस्या, प्रशासनिक चुनौतियों और भविष्य की विकास यात्रा पर खुलकर संवाद हुआ।
कार्यक्रम में बस्तर रेंज के पुलिस महानिदेशक पी. सुंदर राज और जगदलपुर कलेक्टर आकाश शिकारा से INH-हरिभूमि के प्रधान संपादक डॉ. हिमांशु द्विवेदी ने सीधे और तीखे सवाल पूछे।
सवाल: 31 मार्च 2026 की तारीख आपको कितना डराती है? ज़मीन पर हालात क्या हैं?
जवाब – पी. सुंदर राज (पुलिस महानिदेशक, बस्तर रेंज):
भारत सरकार और छत्तीसगढ़ शासन का स्पष्ट संकल्प है कि मार्च 2026 तक बस्तर क्षेत्र से नक्सल गतिविधियों को पूरी तरह समाप्त किया जाएगा। पहले भी प्रयास हुए, लेकिन 31 मार्च 2026 की तय डेडलाइन ने पूरे सिस्टम को एक लक्ष्य पर केंद्रित कर दिया है।
आज प्रशासन, पुलिस, स्थानीय जनप्रतिनिधि और समाज—सभी इसी दिशा में काम कर रहे हैं। वर्ष 2024 और 2025 में हमें निर्णायक और उल्लेखनीय बढ़त मिली है। सबसे अहम बात यह है कि अब नक्सली भी इस सच्चाई को स्वीकार कर रहे हैं, इसी कारण शीर्ष नेतृत्व से लेकर निचले कैडर तक बड़ी संख्या में आत्मसमर्पण हो रहा है।
सवाल: आपसे कौन इतना नाराज़ रहा कि आपको बस्तर से आने नहीं देता?
जवाब – पी. सुंदर राज:
मैं इसे नाराज़गी नहीं, बल्कि सौभाग्य मानता हूं। शासन ने मुझ पर और मेरी टीम पर भरोसा जताया है। बस्तर की जनता, जनप्रतिनिधि और सभी स्टेकहोल्डर्स का सहयोग मिला है। लंबे समय से चली आ रही समस्या के समाधान में भूमिका निभाने का अवसर मिलना हमारे लिए गर्व की बात है।
सवाल: पहले बस्तर पोस्टिंग को सजा माना जाता था, अब क्या हालात बदले हैं?
जवाब – पी. सुंदर राज:
अब पूरी तस्वीर बदल चुकी है। आज बस्तर में एक मजबूत और प्रेरित टीम काम कर रही है। युवा कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक और अधिकारी स्वेच्छा से बस्तर आना चाहते हैं। अब यह पोस्टिंग सजा नहीं, बल्कि परिवर्तन का हिस्सा बनने का अवसर बन गई है।
प्रशासन की नज़र से बस्तर का बदलता चेहरा
सवाल: कलेक्टर बनने पर परिवार और समाज की क्या प्रतिक्रिया रही?
जवाब – आकाश शिकारा (कलेक्टर, बस्तर):
पहले बस्तर को केवल नक्सल प्रभावित क्षेत्र के रूप में देखा जाता था, लेकिन सुरक्षा बलों की लगातार कार्रवाई से यह धारणा बदली है। मैं पहले दंतेवाड़ा में पदस्थ रहा हूं, इसलिए परिवार को भरोसा था कि क्षेत्र सुरक्षित है। यह पोस्टिंग मेरे लिए एक ऐतिहासिक और प्रतिष्ठित अवसर है।
सवाल: क्या यहां काम करना राजनीतिक या व्यापारिक दबावों के कारण मुश्किल है?
जवाब – आकाश शिकारा:
अब तक का अनुभव पूरी तरह सकारात्मक रहा है। जनप्रतिनिधि, व्यापारी और समाज के सभी वर्ग सहयोग कर रहे हैं। सभी मांगें नियमों के तहत आती हैं और उसी के अनुसार कार्रवाई की जाती है।
सवाल: बस्तर में विकास को लेकर सबसे बड़ी चुनौती क्या है?
जवाब – आकाश शिकारा:
यह चुनौती भी है और अवसर भी। केंद्र और राज्य सरकार की प्राथमिकता बस्तर है।
मुख्य परियोजनाएं—
इन सभी को समयबद्ध और गुणवत्ता के साथ ज़मीन पर उतारना प्रशासन की जिम्मेदारी है।
आत्मसमर्पण, पुनर्वास और भविष्य की रणनीति
सवाल: क्या आत्मसमर्पण करने वालों का वास्तव में हृदय परिवर्तन हुआ है?
जवाब – पी. सुंदर राज:
हम केवल ऑपरेशनल कार्रवाई तक सीमित नहीं हैं। पुनर्वास और सामाजिक पुनःएकीकरण हमारी नीति का अहम हिस्सा है। शासन की स्पष्ट पुनर्वास नीति है और समाज भी हिंसा छोड़ने वालों को स्वीकार कर रहा है। साथ ही, किसी भी पुनरावृत्ति पर सख्त निगरानी रखी जा रही है।
सवाल: नक्सलवाद खत्म होने के बाद इतनी बड़ी फोर्स का क्या होगा?
जवाब – पी. सुंदर राज:
पुलिस की आवश्यकता कभी खत्म नहीं होती, केवल उसकी भूमिका बदलती है। भविष्य में फोर्स को कम्युनिटी पुलिसिंग, कानून व्यवस्था, ट्रैफिक प्रबंधन, जनसुरक्षा और विकास सहयोग के लिए री-ओरिएंट और री-ट्रेन किया जाएगा।
स्वास्थ्य और बस्तर की आगे की राह
सवाल: सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल की फीस को लेकर चिंता है?
जवाब – आकाश शिकारा:
BPL और आयुष्मान कार्ड धारकों के लिए इलाज मेडिकल कॉलेज की दरों पर और पूरी तरह कैशलेस रहेगा। 240 बेड का यह सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल बस्तर के लिए मील का पत्थर साबित होगा और लोगों को इलाज के लिए बाहर नहीं जाना पड़ेगा।