देश में घटती देसी मछलियों की प्रजातियों के संरक्षण और मत्स्य पालन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सरकार ने 'मत्स्य प्रजाति विविधीकरण योजना' शुरू की है। इस योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2026-27 में किसानों, मछुआरों और मत्स्य पालन शुरू करने के इच्छुक लोगों को 60 प्रतिशत तक सब्सिडी प्रदान की जाएगी। सरकार का उद्देश्य केवल देसी प्रजातियों का संरक्षण करना ही नहीं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा करना और मत्स्य पालकों की आय बढ़ाना भी है।
आधुनिक मत्स्य पालन को मिलेगा बढ़ावा
नई योजना के जरिए पारंपरिक खेती के साथ आधुनिक मत्स्य पालन को जोड़ने पर जोर दिया जाएगा। सरकार चाहती है कि किसान खेती के साथ मछली पालन को भी आय का मजबूत माध्यम बनाएं। इससे कम लागत में अतिरिक्त कमाई का अवसर मिलेगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
इन गतिविधियों पर मिलेगी सब्सिडी
योजना के अंतर्गत माइनर कार्प (देसी छोटी मछलियां), कैट फिश, वायु-श्वासी मछलियां, झींगा (श्रिम्प) पालन और मोती उत्पादन जैसी गतिविधियों को शामिल किया गया है। इन परियोजनाओं की कुल लागत का 60 प्रतिशत हिस्सा सरकार अनुदान के रूप में उपलब्ध कराएगी, जिससे लाभार्थियों पर शुरुआती निवेश का बोझ काफी कम हो जाएगा।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा नया सहारा
सरकार का मानना है कि यह योजना मछली पालन क्षेत्र में नई संभावनाएं पैदा करेगी। इससे देसी मछलियों की संख्या बढ़ाने के साथ-साथ किसानों और मछुआरों की आमदनी में भी वृद्धि होगी। विशेषज्ञों का कहना है कि वैज्ञानिक तकनीकों और सरकारी सहायता के साथ मत्स्य पालन ग्रामीण युवाओं के लिए रोजगार का बेहतर विकल्प बन सकता है।
संरक्षण के साथ आत्मनिर्भरता पर जोर
योजना का उद्देश्य जैव विविधता को सुरक्षित रखने के साथ-साथ मत्स्य पालन को व्यावसायिक रूप से मजबूत बनाना है। सरकार को उम्मीद है कि अधिक से अधिक लोग इस योजना का लाभ उठाकर स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ेंगे और देसी मछलियों की विलुप्त होती प्रजातियों को संरक्षित करने में भी योगदान देंगे।