नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली के प्रमुख प्रदर्शन स्थल जंतर-मंतर के आसपास अब आम लोगों और वाहनों की आवाजाही आसान हो गई है। दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा के बाद लंबे समय से सड़क पर लगाए गए भारी बैरिकेड्स हटाने का फैसला लिया है। बैरिकेडिंग हटने के बाद जंतर-मंतर से जुड़ी सड़क पर यातायात सामान्य हो गया है। इससे रोजाना इस मार्ग से गुजरने वाले वाहन चालकों और स्थानीय लोगों को बड़ी राहत मिली है। पिछले कई वर्षों से सुरक्षा कारणों के चलते इस इलाके में कड़ी बैरिकेडिंग की गई थी। इसकी वजह से लोगों को आवागमन के लिए वैकल्पिक और घुमावदार रास्तों का इस्तेमाल करना पड़ता था। अब सड़क खुलने से अशोक रोड और टॉल्स्टॉय मार्ग के बीच कनेक्टिविटी पहले की तरह बहाल हो गई है।
सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा के बाद दिल्ली पुलिस का बड़ा फैसला
जंतर-मंतर लंबे समय से राजनीतिक, सामाजिक और जनहित से जुड़े आंदोलनों का प्रमुख केंद्र रहा है। यहां होने वाले विरोध-प्रदर्शनों को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा के लिहाज से कई साल पहले भारी बैरिकेडिंग की व्यवस्था की थी। इस व्यवस्था के कारण आम नागरिकों और वाहन चालकों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता था। कई मार्गों पर आवाजाही प्रतिबंधित होने से लोगों को अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ती थी। हालांकि, राजधानी में हाल के दिनों में प्रदर्शन संबंधी गतिविधियों और सुरक्षा परिस्थितियों की समीक्षा के बाद पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने बैरिकेड्स हटाने का निर्णय लिया। इसके बाद जंतर-मंतर रोड पर सामान्य यातायात बहाल कर दिया गया है।
कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन के बाद बढ़ाई गई थी सुरक्षा
जंतर-मंतर के आसपास सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव के पीछे कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के हालिया विरोध-प्रदर्शनों को भी अहम वजह माना जा रहा है। दरअसल, इन प्रदर्शनों के बाद पिछले महीने दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर को आधिकारिक विरोध-प्रदर्शन स्थलों की सूची से डी-नोटिफाई कर दिया था। इसके बावजूद संभावित विरोध-प्रदर्शनों और सुरक्षा संबंधी इनपुट को ध्यान में रखते हुए इलाके में भारी बैरिकेडिंग जारी रखी गई थी। अब सुरक्षा एजेंसियों की समीक्षा और मौजूदा हालात को देखते हुए रास्ते से बैरिकेड्स हटाने का फैसला किया गया है। इससे जंतर-मंतर रोड पर यातायात सुचारू हुआ है और लोगों को लंबे समय से चली आ रही परेशानी से राहत मिली है।
देश के बड़े आंदोलनों का गवाह रहा है जंतर-मंतर
दिल्ली का जंतर-मंतर केवल एक ऐतिहासिक स्थल ही नहीं, बल्कि देश में लोकतांत्रिक विरोध और जनआंदोलनों की महत्वपूर्ण पहचान भी रहा है। वर्ष 1993 के बाद प्रदर्शनकारियों को संसद और सत्ता के प्रमुख केंद्रों के नजदीक अपनी मांगें उठाने के लिए जंतर-मंतर रोड की ओर स्थानांतरित किया गया था। इसके बाद से यह स्थान सामाजिक, राजनीतिक और राष्ट्रीय मुद्दों पर आवाज उठाने वाले लोगों का प्रमुख केंद्र बन गया। देश के अलग-अलग हिस्सों से आने वाले प्रदर्शनकारी यहां धरना देकर सरकार और प्रशासन तक अपनी मांगें पहुंचाते रहे हैं।
अन्ना आंदोलन और निर्भया कांड के विरोध प्रदर्शनों से जुड़ा इतिहास
जंतर-मंतर का नाम देश के कई बड़े जनआंदोलनों के साथ जुड़ा हुआ है। वर्ष 2011 में सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे के नेतृत्व में भ्रष्टाचार के खिलाफ शुरू हुए आंदोलन के दौरान यह स्थल भी प्रमुख केंद्र बना था। इस आंदोलन में बड़ी संख्या में लोगों ने हिस्सा लिया था। बाद में आंदोलन को रामलीला मैदान में स्थानांतरित कर दिया गया। इसके अलावा, वर्ष 2012 में दिल्ली के चर्चित निर्भया सामूहिक दुष्कर्म और हत्या मामले के बाद भी जंतर-मंतर पर बड़े स्तर पर प्रदर्शन हुए थे। महिला सुरक्षा को मजबूत करने और पीड़िता को न्याय दिलाने की मांग को लेकर हजारों की संख्या में छात्र, युवा और आम नागरिक यहां एकत्रित हुए थे। इस तरह जंतर-मंतर ने दशकों तक देश के कई महत्वपूर्ण सामाजिक और राजनीतिक आंदोलनों को अपनी आवाज दी है।
सड़क खुलने से दिल्लीवासियों को क्या होगा फायदा?
बैरिकेड्स हटने के बाद जंतर-मंतर के आसपास यातायात व्यवस्था पहले की तुलना में अधिक सुगम होने की उम्मीद है।
अशोक रोड से टॉल्स्टॉय मार्ग तक आवाजाही आसान होगी।
वाहन चालकों को लंबे वैकल्पिक रास्तों से राहत मिलेगी।
स्थानीय निवासियों और रोजाना सफर करने वालों का समय बचेगा।
जंतर-मंतर के आसपास यातायात का दबाव कम करने में मदद मिल सकती है।
आम नागरिकों को पहले की तरह सामान्य सड़क सुविधा मिलेगी।
फिलहाल दिल्ली पुलिस के इस फैसले से जंतर-मंतर के आसपास रहने वाले लोगों और इस रास्ते से नियमित सफर करने वाले वाहन चालकों को राहत मिली है।