नई दिल्ली। Delhi Fire Service: दिल्ली में अग्निशमन सेवाओं को और मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। गृह मंत्रालय ने दिल्ली फायर सर्विस (DFS) के पुनर्गठन प्रस्ताव को मंजूरी देते हुए 10,743 नए पदों के सृजन को हरी झंडी दे दी है। इस मंजूरी के बाद दिल्ली फायर सर्विस में स्वीकृत पदों की संख्या 3,175 से बढ़कर 13,918 हो जाएगी। इस फैसले को राजधानी में आग, प्राकृतिक आपदा, रासायनिक हादसों और अन्य आपात परिस्थितियों से निपटने की क्षमता बढ़ाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। प्रस्ताव को अब दिल्ली सरकार के एडमिनिस्ट्रेटिव रिफॉर्म्स विभाग के पास भेजा गया है। वहां से अंतिम मंजूरी मिलने के बाद इन पदों पर भर्ती की प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी।
ऑपरेशनल कैडर में 5,069 नए पद
पुनर्गठन योजना के तहत दिल्ली फायर सर्विस के ऑपरेशनल कैडर में 5,069 नए पद शामिल किए गए हैं। इनमें सबसे ज्यादा पद फायर ऑपरेटर के हैं। जारी सूचि के अनुसार फायर ऑपरेटर – 3,823 पद, लीडिंग फायरमैन – 776 पद, सब ऑफिसर (ST) – 294 पद, स्टेशन ऑफिसर – 176 पद, सुपरवाइजर – 47 पद इन नियुक्तियों से फायर स्टेशनों पर कर्मचारियों की उपलब्धता बढ़ाने और आपात स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया देने में मदद मिलने की उम्मीद है।
5 जोन, 13 डिवीजन और 39 सब-डिवीजन में होगा संचालन
दिल्ली फायर सर्विस के नए ढांचे को राजधानी के प्रशासनिक राजस्व जिलों के आधार पर तैयार किया गया है। इसके तहत दिल्ली को 5 जोन, 13 डिवीजन और 39 सब-डिवीजन में बांटने की योजना है। वरिष्ठ अधिकारियों के लिए भी अतिरिक्त पद बनाए गए हैं। इनमें डिप्टी चीफ फायर ऑफिसर (DCFO) – 4 पद, डिविजनल ऑफिसर (DO) – 11 पद, असिस्टेंट डिविजनल ऑफिसर (ADO) – 32 पद शामिल हैं।
स्पेशल रेस्क्यू के लिए 3,546 पद
बदलते समय के साथ अग्निशमन विभाग को सिर्फ आग बुझाने तक सीमित नहीं रखा जा सकता। ऊंची इमारतों में हादसे, रासायनिक दुर्घटनाओं और अन्य जटिल आपदाओं से निपटने के लिए विशेष टीमों और उपकरणों को मजबूत किया जाएगा। हैजमेट वैन, CBRN रेस्पॉन्स व्हीकल और एरियल लेडर प्लेटफॉर्म जैसी विशेषज्ञ सेवाओं के संचालन के लिए 3,546 पद स्वीकृत किए गए हैं। इसके अलावा ट्रेनिंग, प्रिवेंशन और स्पेशल बटालियन के लिए 608, स्टाफ ट्रेनिंग सेंटर के लिए 294 और फायर प्रिवेंशन हेडक्वार्टर विंग के लिए 170 पद निर्धारित किए गए हैं। सर्च एंड रेस्क्यू बटालियन के लिए 144, तकनीकी एवं प्रशासनिक सपोर्टिंग विंग के लिए 320 और वर्कशॉप/ऑटोमोबाइल विंग के लिए 150 पद रखे गए हैं। कम्युनिकेशन विंग में 137, लीगल विंग में 11 और ऑपरेशन्स बैंड में 9 पद स्वीकृत किए गए हैं।
पहली बार अलग IT विंग का गठन
दिल्ली फायर सर्विस के नए ढांचे में पहली बार अलग IT विंग बनाया जाएगा। इसका उद्देश्य विभाग की डिजिटल व्यवस्था और तकनीकी निगरानी को मजबूत करना है। वर्कशॉप इन्वेंट्री सॉफ्टवेयर और 24 घंटे डिजिटल मॉनिटरिंग जैसी व्यवस्थाओं को विकसित करने से विभाग के कामकाज में पारदर्शिता और तकनीकी दक्षता बढ़ाने की उम्मीद है। फायर स्टेशनों पर कर्मचारियों की बुनियादी जरूरतों के लिए 1,153 मल्टी-टास्किंग स्टाफ (MTS) पद भी स्वीकृत किए गए हैं। इनमें रसोइया, धोबी और मोची जैसे पद शामिल होंगे।
फायर ऑपरेटर भर्ती के नियम बदले
दिल्ली फायर सर्विस में युवाओं के लिए भर्ती के नियमों में भी बदलाव किया गया है। पहले फायर ऑपरेटर पद के लिए आवेदन के समय हेवी मोटर व्हीकल (HMV) ड्राइविंग लाइसेंस जरूरी था। अब कार या हल्के वाहन का लाइसेंस रखने वाले अभ्यर्थी भी भर्ती प्रक्रिया में हिस्सा ले सकेंगे। फायर ऑपरेटर पद के लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता 12वीं पास रखी गई है। चयन प्रक्रिया में लिखित परीक्षा के साथ शारीरिक दक्षता परीक्षा भी शामिल होगी। नियुक्ति के बाद चयनित कर्मचारियों को दो साल के भीतर अपने LMV लाइसेंस को HMV लाइसेंस में अपग्रेड कराना होगा।
71 फायर स्टेशनों में स्टाफ की कमी
दिल्ली में वर्तमान में 71 फायर स्टेशन संचालित हैं। विभाग के मुताबिक इन्हें पर्याप्त कर्मचारियों के साथ चलाने के लिए 12 हजार से ज्यादा कर्मियों की जरूरत है, जबकि अभी सिर्फ 3,175 पद स्वीकृत हैं और लगभग 2,400 कर्मचारी कार्यरत हैं। मैनपावर की कमी का असर फायर टेंडरों की तैनाती पर भी पड़ता है। नियमों के मुताबिक एक फायर टेंडर पर कम से कम छह जवानों का क्रू होना चाहिए। पर्याप्त कर्मचारियों के अभाव में कई बार वाहनों पर पूरा क्रू उपलब्ध नहीं हो पाता। ऐसी स्थिति में किसी घटना के दौरान पर्याप्त संख्या में फायरफाइटर्स भेजने के लिए एक से अधिक फायर टेंडर तैनात करने पड़ सकते हैं। इससे दूसरे इलाकों में आपात स्थिति के दौरान बैकअप प्रभावित होने की आशंका रहती है।
कर्मचारियों पर कम होगा काम का दबाव
मैनपावर की कमी के चलते मौजूदा कर्मचारियों को आग और दूसरी आपात घटनाओं के दौरान लंबे समय तक काम करना पड़ता है। इससे कर्मचारियों पर शारीरिक और मानसिक दबाव बढ़ता है। 10,743 नए पदों की मंजूरी से दिल्ली फायर सर्विस की मानव संसाधन क्षमता में बड़ा इजाफा होने की उम्मीद है। इससे जहां राजधानी की आपदा प्रबंधन और अग्निशमन व्यवस्था मजबूत होगी, वहीं बड़ी संख्या में युवाओं के लिए सरकारी नौकरी के अवसर भी खुल सकते हैं।