छत्तीसगढ़ के अलंकरण पुरस्कारों की घोषणा का इंतजार किया जा रहा है, लेकिन इससे पहले ही यति यतनलाल सम्मान को लेकर विवाद खड़ा होता नजर आ रहा है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रही एक पोस्ट में सम्मान के संभावित चयन पर सवाल उठाए गए हैं। पोस्ट में गौसेवा के क्षेत्र में लंबे समय से काम कर रहे लोगों की अनदेखी किए जाने का आरोप लगाया गया है।
फेसबुक पोस्ट में चयन प्रक्रिया पर उठाए सवाल
दरअसल, फेसबुक यूजर ओमेश बिसेन ने एक पोस्ट के जरिए यति यतनलाल सम्मान को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने पुरस्कार के वास्तविक हकदार और चयन प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए इसे पूंजीवाद से जोड़ दिया। पोस्ट में उनका आरोप है कि सरकार की नजर में गौसेवा के क्षेत्र में काम करने वाले पूंजीपति ही सम्मान के योग्य माने जा रहे हैं।
20 साल से गौसेवा करने वालों की अनदेखी का आरोप
ओमेश बिसेन ने अपनी पोस्ट में दावा किया है कि गौसेवा के क्षेत्र में करीब 20 वर्षों से सक्रिय लोगों को नजरअंदाज किया जा रहा है, जबकि महज 9 महीने से इस क्षेत्र में काम कर रहे एक कथित धन्नासेठ को सम्मान दिए जाने की चर्चा है। उन्होंने इस तुलना के जरिए पुरस्कार चयन को लेकर असंतोष जताया है।
हालांकि, सोशल मीडिया पोस्ट में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। साथ ही, जिस व्यक्ति को सम्मान दिए जाने की चर्चा की जा रही है, उसके नाम की भी सरकार की ओर से आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
सरकार और संस्कृति विभाग की प्रतिक्रिया का इंतजार
यति यतनलाल सम्मान को लेकर उठे सवालों पर फिलहाल राज्य सरकार और संस्कृति विभाग की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में पुरस्कार चयन को लेकर लगाए जा रहे आरोपों की वास्तविकता स्पष्ट नहीं है।
अब सबकी नजरें अलंकरण पुरस्कारों की आधिकारिक घोषणा पर टिकी हैं। सम्मान के लिए किसका चयन होता है और चयन प्रक्रिया को लेकर उठे सवालों पर सरकार क्या रुख अपनाती है, यह घोषणा के बाद ही साफ हो सकेगा।