रायपुर: देश में एक बार फिर चुनावी नक्शा बदलने की तैयारी शुरू हो गई है। केन्द्र सरकार जल्द ही लोकसभा में परिसीमन आयोग के गठन को लेकर विधेयक ला सकती है। यदि यह प्रस्ताव मंजूर होता है, तो करीब 50 साल बाद लोकसभा और विधानसभा सीटों की संख्या में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। छत्तीसगढ़ की बात करें तो यहां 1977 के बाद से सीटों की संख्या में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है। वर्तमान में राज्य में 90 विधानसभा और 11 लोकसभा सीटें हैं, लेकिन प्रस्तावित परिसीमन के बाद यह आंकड़ा काफी बढ़ सकता है।
कितनी बढ़ सकती हैं सीटें?
संभावना जताई जा रही है कि आगामी परिसीमन 2011 की जनगणना के आधार पर किया जाएगा। इसके तहत लोकसभा सीटें 11 से बढ़कर लगभग 15–17, विधानसभा सीटें: 90 से बढ़कर 125 से 135 तक रहेगा, यह बढ़ोतरी राज्य की जनसंख्या और भौगोलिक संतुलन को ध्यान में रखकर की जाएगी।
छत्तीसगढ़ में सीटों का इतिहास
राज्य में अब तक चार बार परिसीमन के जरिए सीटों में बदलाव हुआ है, 1952 82 विधानसभा सीटें, 1957 घटकर 81 सीटें, 1967 बढ़कर 84 सीटें, 1972 के बाद 90 सीटें (अब तक स्थिर) है, 2002 में गठित परिसीमन आयोग ने सिर्फ क्षेत्रों और नामों में बदलाव किया, लेकिन सीटों की संख्या में कोई वृद्धि नहीं की गई।
क्या है परिसीमन आयोग?
परिसीमन आयोग एक स्वतंत्र संस्था होती है, जो जनसंख्या के आधार पर निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाएं और सीटों की संख्या तय करती है। देश में अब तक चार बार इसका गठन किया जा चुका है।
AI से तेज होगी प्रक्रिया
पूर्व राज्य निर्वाचन आयुक्त और सेवानिवृत्त आईएएस डॉ. सुशील त्रिवेदी के अनुसार, पहले परिसीमन की प्रक्रिया में 6–7 साल लग जाते थे। लेकिन अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और आधुनिक संसाधनों की मदद से यह प्रक्रिया कम समय में पूरी हो सकती है। उनका मानना है कि यदि सीटें डेढ़ गुना तक बढ़ती हैं, तो छत्तीसगढ़ में विधानसभा सीटें 135 और लोकसभा सीटें 17 तक पहुंच सकती हैं।
क्या होगा असर?
राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल सकते हैं, नए क्षेत्रों को प्रतिनिधित्व मिलेगा। चुनावी रणनीतियों में बड़ा बदलाव संभव है, क्षेत्रीय संतुलन बेहतर होगा। छत्तीसगढ़ में प्रस्तावित परिसीमन सिर्फ सीटों की संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह राज्य की राजनीति और प्रतिनिधित्व की दिशा को भी बदल सकता है। आने वाले समय में यह बदलाव चुनावी परिदृश्य को पूरी तरह नया रूप दे सकता है।