भोपाल। कोकता स्थिति आरटीओ कार्यालय में पिछले आठ दिनों से सन्नाटा देखने को मिल रहा है। इक्का-दुक्का ही लोग आरटीओ में नजर आ रहे हैं। दअरसल एजेंटों व कियोस्क संचालकों की हड़ताल चल रही है। वहीं प्रभारी आरटीओ जितेंद्र शर्मा भी अधिकारिक पत्र नहीं लगाने पर एजेंट के काम करने को तैयार नहीं हैं। आरटीओ व एजेंटेों के बीच के इस मामले के चलते सबसे अधिक परेशानी आवेदकों को हो रही है। दअरसल, आरटीओ में काम सीधे आवेदक करा सकते हंै, लेकिन अधिकांश आवेदकों के दस्तावेज एजेंटों व कियोस्को संचालकों के
पास ही हैं।
9 हजार से अधिक फाइलें पेंडिंग
सूत्रों की मानें अब तक 9 हजार से अधिक आरटीओ संबंधी कामों की फाइलें हैं, जो पेडिंग हो चुकी हैंं। प्रभारी आरटीओ जितेंद्र शर्मा के पदस्थ करने से पहले आरटीओ में हर दिन एक हजार लोगों के काम होते थे, जो अब न के बराबर हो रहे हैं। ऐसे में यह सवाल उठता है कि लंबे समय से बिना अधिकारिक पत्र जमा किए एजेंट व कियोस्क संचालक संबंधित आवेदकों से मेहनताना लेकर काम करा रहे थे, तो क्या सभी आवेदनों को निरस्त कर देना चाहिए।
आवेदक मायूस होकर निकले बाहर
ऐसे में शहर के अलग-अलग क्षेत्रों से 15 से 30 किमी की दूरी तय करके आए लोग मायूस होकर बाहर से ही लौट जाते हैं। कुछेक आरटीओ के भीतर पहुंचते हैं तो सन्नाटा पसरा देख लौट जाते हैं। इतना ही नहीं, एजेंटों व कियोस्क संचालकों पर कई आवेदनकों की फाइलें जमा हैं, पर आरटीओ की सहमति नहीं मिल रही है।
यह है पूरा मामला
एक तरफ एजेंट व कियोस्क संचालक आरटीओ के निर्देश मानने को तैयार नहीं हैं, जिसमें स्पष्ट किया है कि यदि कोई एजेंट व कियोस्क संचालक किसी आवेदक का आरटीओ संबंधी कोई कार्य का आवेदन लेकर आता है तो उसे आवेदन के साथ में अधिकारिक पत्र लगाना होगा। इधर आरटीओ जितेंद्र शर्मा भी नियमों का हवाला देकर अिड़यल रवैया अपनाए हुए हैं। उनका कहना है कि एजेंटों व कियोस्क संचालकों के काम नियमानुसार ही करेंगे। इस तनातनी का खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है। लोग आरटीओ आते हैं, वैसे ही आरटीओ के बाहर बैठे एजेंट व दुकानें बंद करके बैठे कियोस्क संचालक कह देते हैं कि आरटीओ में काम नहीं होंगे अभी हड़ताल चल रही है।