धार/इंदौर। धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला मुक्ति को लेकर दायर याचिका पर इंदौर हाईकोर्ट में सोमवार को तीखी और विस्तृत बहस हुई। हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस द्वारा वर्ष 2022 से लड़ी जा रही इस कानूनी लड़ाई में आज का दिन बेहद महत्वपूर्ण रहा। न्यायमूर्ति श्री विजय शुक्ला और न्यायमूर्ति श्री आलोक अवस्थी की खंडपीठ के समक्ष करीब दो घंटे तक चली इस सुनवाई में मंदिर के इतिहास और स्थापत्य को लेकर कई बड़े दावे किए गए।
वकील ने पेश किए तथ्य
हिंदू पक्ष की ओर से सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने अदालत के पटल पर भोजशाला का परमार कालीन गौरवशाली इतिहास रखा। उन्होंने अपनी दलीलों में कई बिंदु उठाए। श्री जैन ने बताया कि राजा भोज के शासनकाल में यह स्थान ज्ञान और भक्ति का केंद्र था। बहस के दौरान तर्क दिया गया कि मुस्लिम आक्रांताओं ने कई बार भोजशाला के मूल स्वरूप को बदलकर उसे मस्जिद का रूप देने का असफल प्रयास किया। यहाँ तक कि मंदिर को ध्वस्त कर उसके मलबे का उपयोग संरचना बदलने में किया गया।श्री जैन ने भोजशाला से जुड़े अब तक के सभी पुराने मामलों और याचिकाओं का हवाला देते हुए वर्तमान स्थिति को स्पष्ट किया।
याचिका की 4 प्रमुख मांगें
सुनवाई के दौरान हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की ओर से माननीय न्यायालय के सामने स्पष्ट मांगें रखी गईं। भोजशाला परिसर पर हिंदू समाज का पूर्ण और एकमात्र अधिकार हो। परिसर में होने वाली नमाज को हमेशा के लिए बंद किया जाए। लंदन के संग्रहालय में रखी माँ वाग्देवी (सरस्वती) की मूल प्रतिमा को वापस लाकर भोजशाला में ससम्मान स्थापित किया जाए। माता सरस्वती की प्रतिदिन निर्बाध रूप से पूजा अर्चना करने की अनुमति मिले।
कल दोपहर फिर होगी सुनवाई
अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 7 अप्रैल (मंगलवार) दोपहर 2:30 बजे का समय निर्धारित किया है। आज की कार्यवाही के दौरान मुख्य याचिकाकर्ता आशीष गोयल के साथ अधिवक्ता विनय जोशी, पार्थ यादव, मनी मुंजाल और सौरभ सिंह भी न्यायालय में मौजूद रहे। भोजशाला मामले में हाईकोर्ट का रुख क्या रहता है, इस पर पूरे प्रदेश की नजरें टिकी हुई हैं।