राहुल यादव, उज्जैन : दीपावली रोशनी और खुशियों का पर्व है, लेकिन समाज का एक वर्ग ऐसा भी है जिसके घरों में आज भी अंधेरा पसरा रहता है। किसी परिवार में कोई एचआईवी से जूझ रहा है, कहीं कैंसर पीड़ित हैं, तो कोई झुग्गी-झोपड़ी में रहने वाला व्यक्ति अपने बच्चों को मिठाई तक नहीं दिला पाता। इन्हीं जरूरतमंदों के जीवन में रोशनी भरने के लिए उज्जैन में कुछ सामाजिक संस्थाओं ने मिलकर किसी की दीपावली अंधेरी न रहे अभियान शुरू किया है।
बच्चों के साथ मनाई दिवाली
इस पहल के तहत झुग्गी बस्तियों, अनाथालयों, विशेष बच्चों के स्कूलों और गरीब परिवारों के बीच मिठाई, कपड़े, खिलौने और फटाके वितरित किए जा रहे हैं। अभियान के तीसरे दिन शहर के प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ता महेश परियानी, डॉ. विकास, और मुख्यमंत्री मोहन यादव के भाई नारायण यादव ने स्वयं बच्चों के साथ दीपावली मनाई।
इस अवसर पर एसपी प्रदीप शर्मा और कलेक्टर नीरज कुमार सिंह भी मौजूद रहे। उन्होंने बच्चों को अपने हाथों से मिठाई, कपड़े और फटाके दिए और शहर के एक बड़े मार्ट में उन्हें अपनी पसंद की वस्तुएं चुनने का मौका दिया। वहां बच्चों की आंखों की चमक और मुस्कुराहट ने सभी का दिल जीत लिया।
रातभर चल रहा सेवा कार्य
अभियान के आयोजकों ने बताया कि यहां किसी को कोई फॉर्म नहीं भरना पड़ता, न पहचान दिखानी होती है। जो भी जरूरतमंद आता है, वह अपनी पसंद से चीज़ें चुन सकता है। स्टोर में मिठाई, खिलौनों, कपड़ों और जूतों की भरपूर व्यवस्था की गई है। सेवा का यह कार्य रातभर चलता है ताकि कोई भी वंचित न रह जाए। आयोजकों ने बताया कि पहले दिन जहां करीब 200 बच्चों तक यह प्रयास पहुंचा था, वहीं अब यह संख्या 1400 से अधिक बच्चों तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।
क्रेडाई और लायंस क्लब उज्जैन इस अभियान को लगातार आगे बढ़ा रहे हैं। उनका कहना है कि उद्देश्य केवल वस्तुएं बांटना नहीं, बल्कि यह संदेश देना है कि समाज के ये बच्चे भी इस पर्व का हिस्सा हैं। उज्जैन की इस अनूठी पहल ने यह साबित किया है कि दीपावली सिर्फ घरों की नहीं, बल्कि दिलों की भी रोशनी है। जब इंसान किसी और के जीवन में दीप जलाता है, तो उसके अपने जीवन में भी उजाला बढ़ जाता है।