मुकेश प्रजापति, भैरूंदा: भैरूंदा अंतर्गत सप्त ऋषियों की तपोभूमि पातालेश्वर महादेव सातदेव में 18 मार्च से शुरु हुए 21 दिवसीय कार्यक्रम में प्रतिदिन 21 क्विंटल सामग्री से भव्य हवन का सिलसिला चलता रहा। आजीवन नर्मदा परिक्रमा वासी शिवानंद महाराज(दादाजी) के द्वारा यह भव्य आयोजन संपन्न कराया गया। 21 दिनों में विभिन्न जड़ी बूटियों सहित सोने चांदी की 41 टन सामग्री का उपयोग इस हवन में किया गया। 18 मार्च को शोभा यात्रा के साथ इस कार्यक्रम का शुभारंभ दादा जी के सानिध्य में किया गया। वही 1100 लीटर दूध से मां नर्मदा का अभिषेक भी किया गया।
भैरूंदा क्षेत्र का ग्राम सातदेव पहले से ही सप्त ऋषियों की तपोभूमि रही है। यहां का इतिहास गर्त में छिपा हुआ है और कहा जाता है कि सृष्टि के रचयिता ब्रह्माजी के मानस पुत्र सप्तऋषियों ने इसी स्थान पर कठोर तपस्या की थी। सप्तऋषियों की प्रार्थना पर भगवान शिव पातालेश्वर महादेव के रूप में शिवलिंग रूप में यहीं स्थापित हुए, और तब से यह स्थान भक्तों के लिए पूजनीय बन गया है। इस शिवलिंग की गहराई आज भी एक रहस्य है। 25 से 30 फीट तक खुदाई करने पर भी शिवलिंग ही दिखाई देता है, जो इसके अलौकिक और स्वयंभू स्वरूप को दर्शाता है। इतिहास में भी यह स्थान व्रतांत है। कहा जाता हैं कि रानी कमलापति के साम्राज्य के अधीन गोंड राजाओं ने सप्तऋषियों के नाम पर इस स्थान को सातदेव नाम दिया था। कालांतर में भोसले और होल्कर परिवारों ने भी इस पवित्र स्थल पर अपनी सेवाएं दी हैं। इंदौर की राजमाता अहिल्याबाई होल्कर ने यहाँ एक सुंदर छतरी का निर्माण भी करवाया था, जो इस स्थल के ऐतिहासिक महत्व को और बढ़ाता है। स्थानीय वृद्ध नागरिकों के अनुसार माँ नर्मदा में स्नान के लिए सप्तऋषियों का एक कुंड भी था जो अब विलुप्त हो गया है। सातदेव में आयोजित हो रहे कार्यक्रम मैं सम्मिलित होने के लिए मध्य प्रदेश ही नहीं बल्कि अन्य राज्यों के लोगों भी पहुंचे थे।
5 एकड़ में बनाया विशाल पंडाल...
कार्यक्रम की भव्यता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि श्रद्धालु के बैठने के लिए यहां पर पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। पूरे मंदिर परिसर और आयोजन स्थल को आकर्षक रंग-बिरंगी रोशनी से सजाया गया है। करीब 5 एकड़ क्षेत्र में विशाल पंडाल तैयार किया गया है। जिसमें प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु बैठकर इस भव्य आयोजन के साक्षी बने।
महायज्ञ में कुल 41 टन सामग्री का उपयोग...
18 मार्च से 07 अप्रैल तक आयोजित होने वाले 21 दिवसीय आयोजन कुल 41 टन सामग्री का उपयोग हुआ। जिसमें हवन सामग्री के साथ ही जड़ी बूटियां एवं सोने चांदी का उपयोग भी किया गया। प्रतिदिन 21 क्विंटल सामग्री से दादाजी के सानिध्य में हवन हुआ। आयोजकों का दावा है कि इस तरह का भव्य और विशाल धार्मिक अनुष्ठान प्रदेश ही नहीं देश के चुनिंदा आयोजनों में शामिल है। वहीं 29 मार्च से 7 अप्रैल तक प्रतिदिन दोपहर 91 बजे से शाम 5 बजे तक संगीतमय शिव महापुराण कथा का आयोजन किया।
21 दिन तक धार्मिक अनुष्ठानों की निरंतर श्रृंखला चली, प्रतिदिन 21 क्विंटल सामग्री से महाहवन भी किया गया, शाम होते ही एक दीपों की जगमगाहट और मंत्रोच्चार के बीच संपूर्ण वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत रहा।