उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग उन की बेटी किम जू ए के हालिया सार्वजनिक दौरे ने सत्ता के उत्तराधिकार को लेकर चर्चाओं को तेज कर दिया है। जानिए क्यों यह दौरा बेहद अहम माना जा रहा है।
किम जोंग उन के बाद सत्ता संभालेंगी उनकी बेटी:
उत्तर कोरिया में सत्ता के उत्तराधिकार को लेकर एक बार फिर अटकलें तेज हो गई हैं। इसकी वजह हैं तानाशाह किम जोंग उन की बेटी किम जू ए, जो हाल के वर्षों में लगातार देश की सरकारी मीडिया में प्रमुखता से नजर आ रही हैं। राजधानी प्योंगयांग स्थित कुमसुसान पैलेस ऑफ द सन में उनका हालिया सार्वजनिक दौरा इसी कड़ी का सबसे अहम संकेत माना जा रहा है।
सबसे पवित्र स्थल पर किम जू ए की मौजूदगी क्यों है खास:
उत्तर कोरिया की सरकारी समाचार एजेंसी कोरियन सेंट्रल न्यूज एजेंसी (KCNA) द्वारा जारी तस्वीरों में किम जू ए को 1 जनवरी को अपने माता-पिता के साथ देश के सबसे पवित्र राजनीतिक स्थल पर श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए देखा गया।यहीं उनके दादा किम जोंग इल और परदादा किम इल सुंग के पार्थिव अवशेष रखे गए हैं। किम इल सुंग उत्तर कोरिया के संस्थापक और देश की सत्ता की नींव रखने वाले नेता थे। विश्लेषकों का मानना है कि इस स्थल पर किसी भी व्यक्ति की मौजूदगी केवल पारिवारिक नहीं, बल्कि राजनीतिक उत्तराधिकार का प्रतीक होती है।
तीन साल में बदली किम जू ए की भूमिका:
2010 के दशक की शुरुआत में जन्मीं किम जू ए बीते तीन वर्षों में लगातार मिसाइल परीक्षणों, सैन्य कार्यक्रमों और अब राष्ट्रीय महत्व के आयोजनों में नजर आई हैं। दक्षिण कोरिया की खुफिया एजेंसियों और अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का मानना है कि उन्हें उत्तर कोरिया की चौथी पीढ़ी की नेता के रूप में तैयार किया जा रहा है।
उत्तर कोरिया में पहली महिला शासक का साफ हो रहा है रास्ता:
हालांकि उत्तर कोरिया की राजनीतिक व्यवस्था पूरी तरह गोपनीय रहती है और सत्ता हस्तांतरण को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन किम जू ए की बढ़ती सार्वजनिक भूमिका यह संकेत देती है कि किम परिवार भविष्य की सत्ता संरचना को धीरे-धीरे सामने ला रहा है। यदि ऐसा होता है, तो किम जू ए उत्तर कोरिया के इतिहास में पहली महिला सर्वोच्च नेता बन सकती हैं। कुमसुसान पैलेस ऑफ द सन जैसे प्रतीकात्मक स्थल पर किम जू ए की मौजूदगी को सामान्य घटना मानना मुश्किल है। यह साफ संकेत देता है कि उत्तर कोरिया में सत्ता की अगली पीढ़ी को लेकर तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। अब दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि किम जोंग उन कब और कैसे इस संभावित उत्तराधिकार को औपचारिक रूप देंगे।