MP UGC Protest : यूजीसी द्वारा प्रस्तावित ड्राफ्ट रेगुलेशन और नए नियमों के विरोध में मध्यप्रदेश के कई जिलों में बुधवार को सवर्ण समाज ने एकजुट होकर जोरदार प्रदर्शन किया। उज्जैन, खरगोन और खजुराहो के राजनगर में यूजीसी को काला कानून बताते हुए वापस लेने की मांग की है।
उज्जैन में रैली और मानव श्रृंखला
उज्जैन में टॉवर चौक पर बड़ी संख्या में सवर्ण समाज के लोग एकत्र हुए। प्रदर्शनकारियों ने तख्तियां हाथ में लेकर नारेबाजी की और इसके बाद रैली के रूप में शहीद पार्क तक पहुंचे। इस दौरान मानव श्रृंखला बनाकर विरोध दर्ज कराया गया। प्रदर्शन में महिलाएं, युवा और बुजुर्ग बड़ी संख्या में शामिल रहे। समाजजनों का कहना था कि यूजीसी के प्रस्तावित नियम उच्च शिक्षा व्यवस्था में असंतुलन पैदा करेंगे और सवर्ण वर्ग के छात्रों के शैक्षणिक व रोजगार संबंधी भविष्य को प्रभावित करेंगे। प्रदर्शन के बाद समाज के प्रतिनिधियों ने एसडीएम पवन बारिया और विक्रम विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. डॉ. शैलेन्द्र कुमार को ज्ञापन सौंपकर नियमों को वापस लेने की मांग की।
खरगोन में रैली, राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन
खरगोन में भी स्वर्ण समाज के विभिन्न संगठनों और समुदायों ने यूजीसी कानून के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने इसे हिंदू समाज को विभाजित करने वाला कानून बताते हुए विरोध जताया। राधावल्लभ मार्केट से शुरू हुई रैली शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरते हुए एसडीएम कार्यालय पहुंची, जहां राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा गया। समाजजनों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने कानून पर पुनर्विचार नहीं किया, तो आंदोलन को देशव्यापी रूप दिया जाएगा।
राजनगर (खजुराहो) में सौंपा गया ज्ञापन
खजुराहो के राजनगर तहसील में भी यूजीसी रेगुलेशन एक्ट 2026 के विरोध में प्रदर्शन किया गया। एसडीएम प्रशांत अग्रवाल को राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर कानून को तत्काल निरस्त करने की मांग की गई। इस मौके पर ब्राह्मण समाज, कायस्थ समाज, करणी सेना, वैश्य समाज सहित अन्य वर्गों के प्रतिनिधि मौजूद रहे। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि यह कानून समाज में जातिगत विभाजन को बढ़ावा देता है और सामाजिक सौहार्द को नुकसान पहुंचा सकता है।
आंदोलन तेज करने की चेतावनी
सभी स्थानों पर सवर्ण समाज ने साफ तौर पर कहा है कि यदि सरकार ने यूजीसी के प्रस्तावित नियमों को वापस नहीं लिया, तो आने वाले दिनों में बड़ा आंदोलन किया जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी। फिलहाल प्रशासन ने ज्ञापन स्वीकार कर उन्हें उच्च स्तर तक भेजने का आश्वासन दिया है।