नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र के दौरान लोकसभा ने Tribunal Reforms Bill 2026 को विपक्ष के विरोध और नारेबाजी के बीच पारित कर दिया। कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने विधेयक पेश किया। इस दौरान विपक्षी सांसद NEET पेपर लीक के विरोध में छात्रों के प्रदर्शन पर कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर सरकार से जवाब की मांग कर रहे थे।
विपक्षी सांसदों ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की सदन में मौजूदगी की मांग की। हंगामे के बीच विधेयक पर विस्तृत चर्चा नहीं हो सकी और इसे सदन की कार्यवाही के दौरान पारित कर दिया गया।
ट्रिब्यूनल व्यवस्था में क्या बदलने की तैयारी?
Tribunal Reforms Bill 2026 के जरिए केंद्र सरकार देश के विभिन्न ट्रिब्यूनल्स से जुड़ी नियुक्ति और सेवा व्यवस्था को एक समान बनाने की कोशिश कर रही है। प्रस्तावित कानून में अध्यक्षों और सदस्यों की योग्यता, नियुक्ति प्रक्रिया, कार्यकाल, वेतन, भत्ते और अन्य सेवा शर्तों से जुड़े प्रावधान शामिल किए गए हैं।
इसका उद्देश्य अलग-अलग ट्रिब्यूनल्स में लागू अलग नियमों की जगह एक व्यापक और समान संस्थागत ढांचा तैयार करना है।
बनेगा National Tribunals Commission
विधेयक का सबसे अहम प्रस्ताव National Tribunals Commission का गठन है। प्रस्तावित आयोग का मुख्यालय नई दिल्ली में होगा। यह आयोग विभिन्न ट्रिब्यूनल्स में अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति से जुड़ी प्रक्रिया की निगरानी करेगा।
प्रस्तावित आयोग में पांच सदस्य होंगे। इनमें एक अध्यक्ष के अलावा दो न्यायिक और दो तकनीकी सदस्य शामिल होंगे। आयोग के अध्यक्ष पद के लिए सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश या किसी हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश को पात्रता दी गई है।
नियुक्तियों के लिए समान मानक
नए ढांचे के तहत ट्रिब्यूनल्स में नियुक्तियों के लिए योग्यता और चयन से संबंधित एक समान मानक तैयार करने का प्रस्ताव है। सरकार के अनुसार, इससे नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता और संस्थागत स्थिरता बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
इसके अलावा सदस्यों के कार्यकाल, पारिश्रमिक, इस्तीफे और पद से हटाने से संबंधित नियम भी विधेयक में शामिल किए गए हैं।
2021 के कानून से क्या संबंध?
यह विधेयक Tribunal Reforms Act 2021 के बाद सामने आया नया प्रस्तावित ढांचा है। 2021 के कानून के कुछ प्रावधानों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में न्यायिक समीक्षा हुई थी। अदालत ने ट्रिब्यूनल्स की स्वतंत्रता और नियुक्ति प्रक्रिया से जुड़े कई पहलुओं पर महत्वपूर्ण टिप्पणियां की थीं।
नए प्रस्ताव में एक स्वतंत्र आयोग के जरिए नियुक्तियों की निगरानी का प्रावधान रखा गया है। कानून लागू होने के बाद 2021 के संबंधित कानून को हटाने का भी प्रावधान प्रस्तावित है।
विपक्ष ने क्यों किया विरोध?
विधेयक पर चर्चा के दौरान विपक्षी सांसद NEET पेपर लीक से जुड़े छात्रों के प्रदर्शन का मुद्दा उठा रहे थे। विपक्ष का आरोप था कि 20 जुलाई को प्रदर्शन के दौरान छात्रों के खिलाफ कथित पुलिस कार्रवाई हुई थी और सरकार को इस पर सदन में जवाब देना चाहिए।
इसी मुद्दे को लेकर सदन में नारेबाजी जारी रही। विपक्षी सांसदों ने गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी की मांग भी की। हंगामे के कारण बिल पर सामान्य संसदीय चर्चा नहीं हो सकी।
कानून बनने पर क्या बदलेगा?
विधेयक के कानून बनने के बाद ट्रिब्यूनल व्यवस्था में कई अहम बदलाव प्रस्तावित हैं। इनमें:
National Tribunals Commission का गठन
अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति की निगरानी
नियुक्तियों के लिए समान पात्रता मानक
सदस्यों के कार्यकाल और सेवा शर्तों की स्पष्ट व्यवस्था
वेतन और भत्तों से जुड़े नियम
इस्तीफे और हटाने की प्रक्रिया का निर्धारण
ट्रिब्यूनल प्रशासन में अधिक संस्थागत निगरानी शामिल हैं।
आगे की प्रक्रिया महत्वपूर्ण
लोकसभा से पारित होने के बाद विधेयक को कानून का रूप लेने के लिए आगे की संसदीय प्रक्रिया पूरी करनी होगी। इसके बाद ही प्रस्तावित National Tribunals Commission और उससे जुड़ी नई नियुक्ति व्यवस्था लागू हो सकेगी।