छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में कांग्रेस ने जेलों में बंद आदिवासियों की रिहाई की मांग को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। जिला कांग्रेस अध्यक्ष हरीश कवासी के नेतृत्व में बड़ी संख्या में आदिवासी और कांग्रेस कार्यकर्ता बस स्टैंड पहुंचे और सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि लंबे समय से जेलों में बंद आदिवासियों के मामलों की निष्पक्ष समीक्षा कर निर्दोष लोगों को जल्द रिहा किया जाए।
'रिहाई नहीं हुई तो आंदोलन होगा तेज'
प्रदर्शन के दौरान हरीश कवासी ने कहा कि यदि सरकार ने जल्द सकारात्मक कदम नहीं उठाया तो कांग्रेस आंदोलन को और व्यापक स्तर पर ले जाएगी। उन्होंने आरोप लगाया कि कई आदिवासी वर्षों से जेलों में बंद हैं और उनके मामलों में तेजी से सुनवाई नहीं हो रही है। इस कारण उनके परिवारों को लगातार कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
हरीश कवासी ने उठाए सवाल
मीडिया से बातचीत में हरीश कवासी ने कहा कि सरकार ने आत्मसमर्पण करने वाले कई नक्सलियों को मुख्यधारा में लौटने का अवसर दिया है, लेकिन ऐसे आदिवासी, जो कथित रूप से नक्सली प्रभाव में आए थे और वर्षों से जेल में बंद हैं, उनके मामलों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हो रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि पुनर्वास की नीति लागू की जा रही है तो लंबे समय से बंद आदिवासियों के मामलों की भी मानवीय आधार पर समीक्षा होनी चाहिए।
विक्रम मंडावी ने भी सरकार से की मांग
प्रदर्शन में शामिल बीजापुर विधायक विक्रम मंडावी ने कहा कि कई आदिवासी परिवार आर्थिक संकट से गुजर रहे हैं। उनके अनुसार, जेल में बंद लोगों के परिवारों के पास मुकदमे की पैरवी करने और कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के लिए पर्याप्त संसाधन भी नहीं हैं। उन्होंने सरकार से मांग की कि जिन मामलों में गंभीर साक्ष्य नहीं हैं, उनकी निष्पक्ष जांच कर संबंधित लोगों को राहत दी जाए।
कांग्रेस ने संघर्ष जारी रखने का किया ऐलान
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि वे इस मुद्दे को लगातार उठाते रहेंगे और जब तक जेलों में बंद आदिवासियों के मामलों पर उचित कार्रवाई नहीं होती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। पार्टी ने सरकार से मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए लंबित मामलों का शीघ्र समाधान करने की अपील की।