Nagda railway: नागदा क्षेत्र में पराली जलाने की लापरवाही एक बार फिर भारी पड़ते-पड़ते बची। खेत में जलाई गई पराली की आग फैलते हुए रेलवे ट्रैक तक पहुंच गई, जिससे दिल्ली–मुंबई रेलवे ट्रैक लगभग 30 मिनट तक बाधित रहा। हालांकि समय रहते सतर्कता दिखाने से एक बड़ा हादसा टल गया।
घटना नागदा के समीप रूपेटा रेलवे फाटक के पास की है। बताया जा रहा है कि प्रशासन की सख्त हिदायतों के बावजूद किसान पराली जलाने से बाज नहीं आ रहे हैं। इसी के चलते खेत में लगाई गई आग धीरे-धीरे फैलकर रेलवे ट्रैक के पास झाड़ियों तक पहुंच गई और देखते ही देखते आग ने विकराल रूप ले लिया।
इसी दौरान मुंबई से देहरादून की ओर जाने वाली देहरादून एक्सप्रेस के गुजरने का सिग्नल हो चुका था। ड्यूटी पर तैनात गेटमैन अनुज गुर्जर ने हालात की गंभीरता को भांपते हुए तुरंत अपने वरिष्ठ अधिकारियों को सूचना दी और ट्रेन को रास्ते में ही रोकने का अनुरोध किया। अधिकारियों ने तत्परता दिखाते हुए ट्रेन को रोक दिया, जिसके बाद फायर ब्रिगेड को मौके पर बुलाकर आग पर काबू पाया गया। आग बुझने के बाद ही ट्रेन को आगे रवाना किया गया।
इस पूरी घटना के चलते रेलवे ट्रैक करीब आधे घंटे तक बाधित रहा, जिससे अन्य ट्रेनों का संचालन भी प्रभावित हुआ और कुछ ट्रेनें लेट हो गईं। यदि समय रहते ट्रेन को नहीं रोका जाता, तो यात्री ट्रेन आग की लपटों के बीच से गुजर सकती थी, जिससे यात्रियों की जान को खतरा हो सकता था और ट्रेन की बोगियों में भी आग लगने की आशंका थी।
घटना स्थल पर यूनिट-1 के हेड कांस्टेबल राजेन्द्र सिंह, आरपीएफ स्टाफ, सिग्नल स्टाफ और मोहन सिंह ने भी पहुंचकर आग बुझाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। गेटमैन अनुज गुर्जर की सतर्कता और त्वरित निर्णय से संभावित बड़े हादसे को टाल दिया गया।
गौरतलब है कि यदि उस समय ट्रैक से कोई डीजल या कोयला मालगाड़ी गुजर रही होती, तो स्थिति और भी भयावह हो सकती थी। इसके बावजूद अब तक पराली जलाने वाले खेत मालिक के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। रेलवे विभाग ने मामले की जांच के निर्देश दिए हैं। आरपीएफ महिदपुर रेलवे चौकी प्रभारी अशोक यादव के अनुसार, ट्रैक मेंटेनेंस से जुड़े विभाग द्वारा संबंधित खेत मालिक के खिलाफ कार्रवाई के लिए प्रशासन को पत्र भेजा जाएगा।