नई दिल्ली। शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही और कथित परीक्षा पेपर लीक के मुद्दे को लेकर अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने केंद्र सरकार के नाम खुला पत्र जारी किया है। यह पत्र केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह को संबोधित है, जिसमें उन्होंने तीन प्रमुख मांगों पर स्पष्ट और लिखित आश्वासन देने की अपील की है। वांगचुक ने कहा कि यदि सरकार उनकी मांगों पर भरोसा देती है तो वह अपना अनशन समाप्त कर देंगे, अन्यथा आंदोलन जारी रहेगा।
अस्पताल में मुलाकात के लिए जताया आभार
22 जुलाई 2026 को लिखे गए पत्र में वांगचुक ने दोनों केंद्रीय मंत्रियों का धन्यवाद करते हुए कहा कि उन्होंने अस्पताल पहुंचकर उनसे मुलाकात की और अनशन समाप्त करने का आग्रह किया। उन्होंने लिखा कि बातचीत के दौरान सरकार की ओर से कुछ मुद्दों पर सकारात्मक संकेत मिले, लेकिन अब उन्हें औपचारिक आश्वासन की प्रतीक्षा है।
सरकार के सामने रखीं तीन प्रमुख मांगें
अपने पत्र में सोनम वांगचुक ने सरकार के सामने तीन मुख्य मांगें रखीं—
कथित परीक्षा पेपर लीक की घटनाओं के बाद आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को उचित मुआवजा दिया जाए।
पूरे मामले पर संसद में गंभीर चर्चा कर जवाबदेही तय की जाए तथा शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के मुद्दे पर भी विचार किया जाए।
आंदोलन में शामिल किसी भी छात्र या युवा के खिलाफ कोई प्रतिशोधात्मक या दंडात्मक कानूनी कार्रवाई न की जाए।
'युवाओं का दोष सिर्फ इतना है कि उन्होंने सवाल उठाए'
वांगचुक ने कहा कि आंदोलन में शामिल छात्रों और युवाओं ने केवल निष्पक्ष, पारदर्शी और जवाबदेह शिक्षा व्यवस्था की मांग की है। उन्होंने सरकार से अपील की कि प्रदर्शन में शामिल किसी भी व्यक्ति को भविष्य में कानूनी कार्रवाई या उत्पीड़न का सामना न करना पड़े, इसका स्पष्ट आश्वासन दिया जाए।
आश्वासन मिलने पर खत्म होगा अनशन
पत्र में उन्होंने स्पष्ट लिखा कि यदि सरकार लिखित रूप से भरोसा देती है कि छात्रों और युवाओं के खिलाफ कोई प्रतिशोधात्मक कार्रवाई नहीं होगी, तो वह तुरंत अपना अनिश्चितकालीन अनशन समाप्त कर देंगे। उन्होंने कहा कि ऐसा होने पर उन्हें विश्वास होगा कि सरकार ने उनकी ही नहीं, बल्कि देशभर के लाखों युवाओं की भावनाओं का सम्मान किया है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि यदि ऐसा आश्वासन नहीं मिला तो उनका अनशन आगे भी जारी रहेगा।
'चलो संसद' रैली और पुलिस कार्रवाई का भी किया जिक्र
सोनम वांगचुक ने अपने पत्र में 20 जुलाई को आयोजित 'चलो संसद' रैली का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रदर्शन शांतिपूर्ण था, लेकिन इसके दौरान पुलिस द्वारा बल प्रयोग किया गया। उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य में लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने वाले युवाओं के खिलाफ कठोर कार्रवाई नहीं की जाएगी।
लोकतंत्र पर भी रखी अपनी बात
पत्र के अंत में वांगचुक ने लिखा कि किसी भी लोकतंत्र की असली पहचान इस बात से होती है कि वह अपने युवाओं की आवाज और उनके शांतिपूर्ण विरोध के साथ कैसा व्यवहार करता है। उन्होंने सरकार से लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करने और युवाओं के विश्वास को मजबूत करने की अपील की।
