नई दिल्ली: NALSAR Law University से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने लॉ स्टूडेंट्स और बार काउंसिल की शक्तियों को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि Bar Council of India (BCI) या State Bar Councils का वैधानिक अनुशासनात्मक अधिकार लॉ की पढ़ाई कर रहे छात्रों पर उसी तरह लागू नहीं होता, जैसा एनरोल्ड एडवोकेट्स पर होता है। सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय पीठ ने इस मामले में यह अंतर स्पष्ट किया कि कानून की पढ़ाई कर रहा छात्र और बार काउंसिल में अधिवक्ता के तौर पर एनरोल हो चुका व्यक्ति कानूनी रूप से एक समान स्थिति में नहीं होते।
एडवोकेट बनने के बाद लागू होता है Bar Council का अनुशासन
अदालत की टिप्पणी के मुताबिक, बार काउंसिल की अनुशासनात्मक शक्तियां मुख्य रूप से उन लोगों के पेशेवर आचरण से संबंधित हैं, जो एडवोकेट के रूप में एनरोल हो चुके हैं। वहीं, जब कोई व्यक्ति लॉ यूनिवर्सिटी या लॉ कॉलेज में छात्र के तौर पर पढ़ाई कर रहा होता है, तो उसके आचरण और अनुशासन से जुड़े मामलों को संबंधित शिक्षण संस्थान के नियमों के अनुसार देखा जाता है। इस तरह सुप्रीम कोर्ट ने लॉ स्टूडेंट्स और प्रैक्टिस कर रहे अधिवक्ताओं के बीच नियामक अधिकारों का अंतर रेखांकित किया है।
लॉ यूनिवर्सिटी अपने नियमों के तहत कर सकती है कार्रवाई
पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि लॉ स्टूडेंट्स के अनुशासन से जुड़े मामलों में संबंधित विश्वविद्यालय या संस्थान अपने नियमों और विनियमों के आधार पर कार्रवाई कर सकता है। यानी यदि किसी छात्र के व्यवहार को लेकर अनुशासनात्मक मामला सामने आता है, तो सबसे पहले यह देखा जाएगा कि संबंधित यूनिवर्सिटी के नियम इस तरह के मामले में क्या प्रावधान करते हैं। बार काउंसिल का मुख्य नियामक दायरा अधिवक्ताओं के पेशेवर आचरण और कानूनी पेशे से जुड़े मामलों से संबंधित है।
CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने की सुनवाई
NALSAR से जुड़े इस विवाद की सुनवाई चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की तीन सदस्यीय पीठ ने की। मामले में Bar Council of India की ओर से जारी एक आदेश भी चर्चा में रहा था, जिसे बाद में वापस ले लिया गया। इसी घटनाक्रम के बीच बार काउंसिल के अधिकार क्षेत्र और लॉ स्टूडेंट्स पर उसके अनुशासनात्मक अधिकार को लेकर सवाल सामने आए।
क्या है NALSAR विवाद?
NALSAR यानी National Academy of Legal Studies and Research देश के प्रमुख लॉ संस्थानों में गिना जाता है। यूनिवर्सिटी से जुड़े विवाद में BCI की भूमिका और उसके आदेश को लेकर कानूनी सवाल उठे। सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी ने व्यापक रूप से यह अंतर सामने रखा कि लॉ यूनिवर्सिटी के छात्र और बार काउंसिल में पंजीकृत अधिवक्ता दो अलग-अलग कानूनी श्रेणियां हैं। एक छात्र के तौर पर व्यक्ति अपने विश्वविद्यालय की आंतरिक व्यवस्था और अनुशासनात्मक नियमों के अधीन रहता है, जबकि एडवोकेट के रूप में एनरोलमेंट के बाद उसके पेशेवर आचरण पर संबंधित बार काउंसिल के नियम लागू होते हैं।
छात्रों और एनरोल्ड एडवोकेट्स के अधिकार क्षेत्र में अंतर
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यही है कि लॉ की पढ़ाई करने वाले छात्रों पर विश्वविद्यालय का अनुशासनात्मक क्षेत्र और एनरोल्ड एडवोकेट्स पर Bar Council का पेशेवर अनुशासनात्मक क्षेत्र अलग-अलग है। इस टिप्पणी से लॉ स्टूडेंट्स के अनुशासन और Bar Council की नियामक शक्तियों के बीच अधिकार क्षेत्र को समझने में महत्वपूर्ण कानूनी स्पष्टता मिलती है।