नई दिल्ली। दिल्ली के लाल किला इलाके में हुए विस्फोट मामले की चार्जशीट में जांच एजेंसी ने कई अहम दावे किए हैं। NIA के अनुसार, धमाके में इस्तेमाल की गई Hyundai i20 को विस्फोटक से लैस कर Vehicle-Borne Improvised Explosive Device (VBIED) के रूप में इस्तेमाल किया गया था। फॉरेंसिक जांच और घटनास्थल से जुटाए गए साक्ष्यों के आधार पर एजेंसी ने इसे सुनियोजित आतंकी साजिश का हिस्सा बताया है।
चार्जशीट के मुताबिक, कार के मलबे और घटनास्थल से मिले नमूनों की वैज्ञानिक जांच में कई विस्फोटक पदार्थों के अंश पाए गए। एजेंसी ने फॉरेंसिक रिपोर्ट, DNA जांच, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य और अन्य बरामदगी को जांच की महत्वपूर्ण कड़ी बताया है।
DNA जांच से कार में मौजूद व्यक्ति की पहचान का दावा
NIA की चार्जशीट के अनुसार, घटनास्थल से मिले जैविक नमूनों की DNA फिंगरप्रिंटिंग कराई गई। जांच एजेंसी का दावा है कि इन नमूनों के आधार पर धमाके के समय कार में मौजूद व्यक्ति की पहचान उमर उन नबी के रूप में हुई। एजेंसी ने इस वैज्ञानिक जांच को मामले की अहम कड़ी बताया है। चार्जशीट में कहा गया है कि DNA रिपोर्ट समेत अन्य साक्ष्यों को जोड़कर जांचकर्ताओं ने विस्फोट में इस्तेमाल वाहन और आरोपी के बीच संबंध स्थापित करने का दावा किया है।
कमांड मैकेनिज्म की बरामदगी का जिक्र
चार्जशीट में घटनास्थल के आसपास से मिले एक कथित कमांड मैकेनिज्म का भी उल्लेख किया गया है। NIA के मुताबिक, बरामद उपकरण और अन्य फॉरेंसिक साक्ष्यों की जांच में विस्फोटक पदार्थों के निशान मिले। जांच एजेंसी का दावा है कि इस साक्ष्य से यह संकेत मिलता है कि वाहन में लगाया गया विस्फोटक एक सुनियोजित प्रणाली के तहत सक्रिय किया गया था। हालांकि, मामले से जुड़े सभी आरोप अदालत में सुनवाई और सबूतों की कानूनी जांच के अधीन हैं।
नौगाम थाने में हुए विस्फोट की घटना भी चार्जशीट का हिस्सा
चार्जशीट में नौगाम पुलिस स्टेशन से जुड़े एक अलग मामले का भी उल्लेख किया गया है। NIA के अनुसार, एक आरोपी के किराये के ठिकाने से जांच के दौरान संदिग्ध विस्फोटक सामग्री, केमिकल, उपकरण और अन्य सामान बरामद किए गए थे।
इन वस्तुओं को जांच के लिए नौगाम पुलिस स्टेशन लाया गया था। चार्जशीट के मुताबिक, 14 नवंबर 2025 को पुलिस स्टेशन परिसर में विस्फोट हुआ, जिसमें 9 पुलिसकर्मियों की मौत और 29 लोगों के घायल होने की बात दर्ज है। घटना में परिसर और आसपास की इमारतों को भी नुकसान पहुंचा था।
फॉरेंसिक जांच में विस्फोटक के अंश मिलने का दावा
NIA ने चार्जशीट में घटनास्थल से जब्त कई नमूनों की वैज्ञानिक जांच का विवरण दिया है। एजेंसी के अनुसार, कुल 73 एग्जिबिट जब्त किए गए, जिनमें से अधिकांश की जांच CFSL चंडीगढ़ और अन्य नमूनों की जांच NFSU गांधीनगर में कराई गई।
चार्जशीट में दावा किया गया है कि अलग-अलग फॉरेंसिक जांच में TATP समेत अन्य विस्फोटक पदार्थों के अंश मिले। NIA ने इसे घटनास्थल से बरामद साक्ष्यों और मामले में सामने आई कथित साजिश के बीच महत्वपूर्ण वैज्ञानिक कड़ी बताया है।
ऑनलाइन गतिविधियों और ड्रोन को लेकर भी जांच
चार्जशीट के अनुसार, आरोपी जसीर बिलाल वानी की ऑनलाइन गतिविधियों की भी जांच की गई। एजेंसी का दावा है कि उसने इंटरनेट प्लेटफॉर्म और AI आधारित टूल्स के जरिए हथियारों और रॉकेट से संबंधित सामग्री खोजी थी। NIA ने यह भी आरोप लगाया है कि मामले से जुड़े एक अन्य आरोपी ने उसे दो ड्रोन उपलब्ध कराए थे। चार्जशीट में कथित तौर पर एक रॉकेट तैयार करने और उसकी टेस्टिंग की योजना का भी जिक्र किया गया है, जिसे बाद में टाल दिया गया।
पेन ड्राइव से तस्वीरें और हथियारों से जुड़े साक्ष्य मिलने का दावा
जांच एजेंसी ने चार्जशीट में शाहीन सईद के एक पेन ड्राइव से मिले डिजिटल साक्ष्यों का भी उल्लेख किया है। NIA का दावा है कि इसमें कई तस्वीरें बरामद हुईं, जिनमें कुछ आरोपियों के हथियारों के साथ दिखाई देने की बात कही गई है। एजेंसी ने इन डिजिटल साक्ष्यों की जांच को मामले में शामिल लोगों के आपसी संबंधों और कथित आतंकी गतिविधियों की पड़ताल के लिए महत्वपूर्ण बताया है।
Signal ऐप पर कोड नेम से संपर्क का आरोप
चार्जशीट के मुताबिक, आरोपियों ने आपसी बातचीत और संपर्क के लिए Signal ऐप का इस्तेमाल किया। NIA ने दावा किया कि जांच के दौरान कुछ संदिग्ध अकाउंट और कोड नेम की जानकारी सामने आई। इसके अलावा एजेंसी ने कट्टरपंथी और हिंसक विचारधारा से जुड़ी सामग्री तथा कथित आतंकी साहित्य बरामद होने का भी दावा किया है। जांच में इन दस्तावेजों और डिजिटल सामग्री की भूमिका की पड़ताल की जा रही है।
प्रतिबंधित आतंकी संगठनों से संबंध का दावा
NIA के अनुसार, जांच में सामने आए कुछ आरोपी प्रतिबंधित आतंकी संगठनों Ansar Ghazwat-ul-Hind (AGuH) और Al-Qaeda in the Indian Subcontinent (AQIS) से कथित तौर पर जुड़े हुए थे। चार्जशीट में इन संगठनों से संबंधित प्रचार सामग्री और अन्य दस्तावेज मिलने का भी जिक्र किया गया है। जांच एजेंसी ने विभिन्न फॉरेंसिक, डिजिटल और भौतिक साक्ष्यों को जोड़ते हुए कथित साजिश की पूरी श्रृंखला स्थापित करने की कोशिश की है।
उमर उन नबी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई हुई समाप्त
चार्जशीट के मुताबिक, उमर उन नबी की मौत 10 नवंबर को हुए विस्फोट में हो गई थी। इसके चलते उसके खिलाफ दर्ज UAPA, Arms Act और Explosive Substances Act से जुड़े आरोपों की कानूनी कार्रवाई उसकी मृत्यु के कारण समाप्त कर दी गई। मामले में अन्य आरोपियों के खिलाफ जांच और कानूनी प्रक्रिया जारी है। NIA के चार्जशीट में किए गए दावे अब आगे अदालत में साक्ष्यों और कानूनी सुनवाई के आधार पर परखे जाएंगे।