नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने बुधवार को अपनी द्विमासिक समीक्षा बैठक में नीतिगत ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करने का फैसला लिया। केंद्रीय बैंक ने रेपो रेट 5.25 प्रतिशत पर यथावत बनाए रखा है। साथ ही मौद्रिक नीति का रुख (Policy Stance) भी 'न्यूट्रल' रखा गया है। आरबीआई का मानना है कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों और महंगाई के रुझानों को देखते हुए फिलहाल सतर्क रणनीति अपनाना जरूरी है।
प्रमुख ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं
एमपीसी के फैसले के बाद अन्य प्रमुख दरें भी पहले की तरह बरकरार रहेंगी।
रेपो रेट: 5.25%
स्टैंडिंग डिपॉजिट फैसिलिटी (SDF): 5.00%
मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी (MSF): 5.50%
बैंक रेट: 5.50%
आरबीआई का कहना है कि मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों में स्थिर ब्याज दरें विकास और महंगाई के बीच संतुलन बनाए रखने में मदद करेंगी।
FY27 के लिए GDP ग्रोथ अनुमान बढ़ाकर 6.7% किया
केंद्रीय बैंक ने भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर सकारात्मक संकेत देते हुए वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) के लिए जीडीपी वृद्धि दर का अनुमान 6.6% से बढ़ाकर 6.7% कर दिया है। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि मजबूत घरेलू मांग, विनिर्माण क्षेत्र की बेहतर गतिविधियां, सेवा क्षेत्र का विस्तार और निर्यात में सुधार भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान कर रहे हैं।
महंगाई पर क्या बोला RBI?
गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि खाद्य और ईंधन की कीमतों के कारण हेडलाइन महंगाई पर दबाव बना हुआ है, लेकिन कोर इन्फ्लेशन अभी भी नियंत्रित दायरे में है। उन्होंने कहा कि अब तक व्यापक स्तर पर कीमतों में तेज बढ़ोतरी के संकेत नहीं मिले हैं। आरबीआई का अनुमान है कि चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में महंगाई अपने उच्च स्तर पर पहुंच सकती है, जिसके बाद इसमें धीरे-धीरे नरमी आने की संभावना है।
वैश्विक परिस्थितियों पर RBI की नजर
आरबीआई ने स्वीकार किया कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और वैश्विक व्यापार नीतियों को लेकर बनी अनिश्चितता आर्थिक गतिविधियों को प्रभावित कर सकती है। गवर्नर ने कहा कि भविष्य में किसी भी नीतिगत बदलाव का निर्णय महंगाई और वैश्विक आर्थिक संकेतकों की स्पष्ट तस्वीर सामने आने के बाद ही लिया जाएगा।
अर्थव्यवस्था पर संतुलित नजरिया
मौद्रिक नीति समिति का मानना है कि भारतीय अर्थव्यवस्था फिलहाल मजबूत स्थिति में है, लेकिन वैश्विक जोखिमों और महंगाई के रुझानों को देखते हुए सतर्क दृष्टिकोण बनाए रखना आवश्यक है। इसी वजह से इस बार ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया और मौजूदा नीति को बरकरार रखा गया।