सूरजपुर। परसिया ग्राम पंचायत में सड़क और अन्य बुनियादी सुविधाओं को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश अब सड़क पर नजर आने लगा है। अपनी मांगों को लेकर करीब एक सप्ताह से भूख हड़ताल कर रहे ग्रामीणों ने सोमवार को करीब 15 किलोमीटर का पैदल सफर तय किया और ब्लॉक मुख्यालय पहुंचकर अधिकारियों के सामने अपनी समस्याएं रखीं। ग्रामीणों ने जल्द से जल्द सड़क निर्माण सहित मूलभूत सुविधाओं से जुड़ी मांगों पर कार्रवाई की मांग की।
एक सप्ताह से जारी थी भूख हड़ताल
ग्रामीणों का कहना है कि परसिया गांव की सड़क लंबे समय से खराब स्थिति में है। खराब सड़क के कारण ग्रामीणों को रोजाना आवागमन में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। उनका दावा है कि सड़क निर्माण को लेकर कई बार जिम्मेदार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के समक्ष मांग रखी गई, लेकिन अब तक समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका।
इसी के विरोध में ग्रामीण पिछले करीब एक सप्ताह से भूख हड़ताल पर बैठे थे। मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाते हुए उन्होंने सोमवार को पैदल मार्च शुरू किया।
15 किलोमीटर पैदल चलकर जनपद कार्यालय पहुंचे
ग्राम पंचायत से निकले ग्रामीण करीब 15 किलोमीटर पैदल चलकर जनपद पंचायत कार्यालय पहुंचे। यहां उन्होंने अधिकारियों से मुलाकात कर सड़क निर्माण समेत गांव की अन्य बुनियादी समस्याओं से अवगत कराया।
ग्रामीणों ने कहा कि लंबे समय से समस्याओं के निराकरण का इंतजार किया जा रहा है। ऐसे में अब प्रशासन से सिर्फ आश्वासन नहीं, बल्कि जमीन पर ठोस कार्रवाई की उम्मीद है।
विकास निधि को लेकर भी ग्रामीणों के सवाल
आंदोलन कर रहे ग्रामीणों ने पंचायत को मिलने वाली विकास निधि के इस्तेमाल को लेकर भी सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि विकास के लिए राशि उपलब्ध होने के बावजूद परसिया ग्राम पंचायत में सड़क जैसी जरूरी सुविधा की समस्या बनी हुई है।
ग्रामीणों ने सवाल किया कि जब अन्य क्षेत्रों में विकास कार्य हो रहे हैं, तो उनके गांव में बुनियादी सड़क सुविधा के लिए लोगों को आंदोलन और भूख हड़ताल क्यों करनी पड़ रही है।
मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े के विधानसभा क्षेत्र में आंदोलन
परसिया ग्राम पंचायत के ग्रामीणों का आंदोलन अब प्रशासनिक स्तर के साथ राजनीतिक चर्चा का विषय भी बन रहा है। मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े के विधानसभा क्षेत्र में सड़क जैसी मूलभूत सुविधा की मांग को लेकर ग्रामीणों का 15 किलोमीटर पैदल चलकर ब्लॉक मुख्यालय पहुंचना प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के लिए भी सवाल खड़े करता है। ग्रामीणों ने प्रशासन से उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार कर जल्द समाधान की दिशा में कदम उठाने की मांग की है।