इंदौर। Indore Human Trafficking: मध्य प्रदेश के इंदौर में मानव तस्करी के एक संगठित गिरोह का सनसनीखेज खुलासा हुआ है। बाणगंगा थाना पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 15 वर्षीय नाबालिग लड़की को सुरक्षित बरामद किया है और इस मामले में चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि गिरोह आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की नाबालिग बेटियों को लालच देकर फर्जी दस्तावेज तैयार करता था और उनकी शादी करवाकर लाखों रुपये का अवैध कारोबार चला रहा था।
मां की शिकायत से खुला पूरा नेटवर्क
पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब पीड़िता की मां ने बेटी के लापता होने की शिकायत पुलिस में दर्ज कराई। जांच के दौरान पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों और पीड़िता के बयान के आधार पर गिरोह तक पहुंच बनाई। पुलिस के अनुसार आरोपी नाबालिग लड़कियों को बेहतर जीवन, घर और बड़ी रकम का लालच देकर अपने जाल में फंसाते थे।
फर्जी दस्तावेज बनाकर बालिग दिखाया
जांच में सामने आया कि आरोपियों ने लड़की की वास्तविक उम्र छिपाने के लिए उसकी जन्मतिथि बदलकर फर्जी पहचान पत्र तैयार किए। इसके बाद गिरोह के सदस्य खुद को लड़की के रिश्तेदार बताकर शादी की पूरी प्रक्रिया को अंजाम देते थे। पुलिस के मुताबिक रतलाम जिले के एक युवक और उसके परिवार से लड़की की असली उम्र छिपाकर करीब तीन लाख रुपये में शादी तय कर दी गई थी। शादी के बाद नाबालिग को दूल्हे के घर भेज दिया गया।
पुलिस दबाव के बाद वापस लाई गई पीड़िता
तकनीकी जांच के जरिए पुलिस लगातार आरोपियों की गतिविधियों पर नजर रख रही थी। पुलिस का दबाव बढ़ने पर आरोपी नाबालिग को वापस इंदौर लेकर आए। इसके बाद पीड़िता ने पुलिस और अपनी मां के सामने पूरे घटनाक्रम का खुलासा किया।
चार आरोपी गिरफ्तार, कई फरार
पुलिस ने इस मामले में मुख्य आरोपी संजय उर्फ संजू यादव, रामविलास उर्फ राकेश यादव, दूल्हा संजू पाटीदार और उसके पिता नंदराम पाटीदार को गिरफ्तार कर लिया है। वहीं, सोनू बंजारा, किशोर चौहान, कच्छूलाल गुर्जर, लालसिंह गुर्जर और बाबू दादा समेत अन्य फरार आरोपियों की तलाश की जा रही है।
मोबाइल से मिले अहम सबूत
जांच के दौरान आरोपियों के मोबाइल फोन से कई लड़कियों के वीडियो, संदिग्ध दस्तावेज और वित्तीय लेनदेन से जुड़े रिकॉर्ड बरामद हुए हैं। पुलिस को आशंका है कि गिरोह पहले भी कई नाबालिग और युवतियों की फर्जी शादियां कराकर मानव तस्करी जैसी गतिविधियों को अंजाम दे चुका है।
शादी के बाद भी चलता था ठगी का खेल
प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि गिरोह लड़कियों को शादी के बाद कुछ दिन ससुराल में रहने की ट्रेनिंग देता था। इसके बाद वे जेवर और कीमती सामान लेकर फरार हो जाती थीं। यदि पीड़ित परिवार पुलिस में शिकायत करता, तो गिरोह उन्हें दुष्कर्म के झूठे मामलों में फंसाने की धमकी देता था। फिलहाल पुलिस पूरे नेटवर्क, दस्तावेजों की जालसाजी, आर्थिक लेनदेन और संभावित अंतरराज्यीय कनेक्शन की गहन जांच कर रही है।