नई दिल्ली। ईरान में जारी राजनीतिक अस्थिरता और आंतरिक तनाव का सीधा असर अब भारतीय बासमती चावल के कारोबार पर दिखने लगा है। बीते एक सप्ताह में घरेलू बाजार में बासमती चावल की कीमतों में 5 से 7 रुपये प्रति किलो तक की गिरावट दर्ज की गई है। निर्यात प्रभावित होने, भुगतान में देरी और बढ़ते व्यापारिक जोखिमों ने भारतीय निर्यातकों की चिंता बढ़ा दी है।
व्यापारिक गतिविधियां बाधित:
इंडियन राइस एक्सपोर्टर्स फेडरेशन (IREF) के अनुसार, ईरान लंबे समय से भारतीय बासमती चावल का एक प्रमुख आयातक रहा है, लेकिन मौजूदा हालात में वहां व्यापारिक गतिविधियां बाधित हुई हैं। नागरिक अशांति के कारण सप्लाई चेन प्रभावित हुई है और भुगतान प्रक्रिया भी धीमी पड़ गई है। फेडरेशन का कहना है कि हालिया गिरावट में 1121 बासमती, 1121 सेला, 1509, 1718 और 1401 जैसी प्रमुख किस्में शामिल हैं। फिलहाल 1121 बासमती चावल की कीमत घटकर लगभग 80 रुपये प्रति किलो और 1121 सेला की कीमत 75 रुपये प्रति किलो के आसपास पहुंच गई है। अन्य किस्मों में 5 से 7 रुपये प्रति किलो तक की गिरावट दर्ज की गई है।
ईरान से व्यापार करने वाले देशों पर लगेगा टैरिफ की घोषणा:
निर्यातकों की चिंता उस वक्त और बढ़ गई जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान से व्यापार करने वाले देशों पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगाने की घोषणा की। हालांकि IREF का मानना है कि इसका तत्काल असर अमेरिका को होने वाले भारतीय बासमती निर्यात पर सीमित रहेगा, लेकिन वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता जरूर बढ़ सकती है। IREF के उपाध्यक्ष देव गर्ग ने कहा कि ईरान में मौजूदा हालात के चलते खरीदारों का भरोसा कमजोर हुआ है और भुगतान में जोखिम बढ़ा है। ऐसे में आने वाले हफ्तों में बासमती चावल की कीमतों पर और दबाव बन सकता है।
अरब डॉलर मूल्य का बासमती चावल:
आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल से नवंबर के बीच भारत ने ईरान को लगभग 4.68 अरब डॉलर मूल्य का बासमती चावल निर्यात किया, जिसकी मात्रा करीब 5.98 लाख टन रही। यही कारण है कि ईरान में आई अस्थिरता का असर भारतीय बाजार पर तेजी से पड़ा है। फेडरेशन ने निर्यातकों को सलाह दी है कि वे ईरान पर निर्भरता कम करें और पश्चिम एशिया, अफ्रीका तथा यूरोप जैसे वैकल्पिक बाजारों की ओर रुख करें। साथ ही सुरक्षित भुगतान प्रणालियों को अपनाने और केवल ईरान केंद्रित स्टॉक पर ज्यादा जोखिम न लेने की चेतावनी भी दी गई है।