भोपाल : बालाघाट में आदिवासी बच्चों की मौत के मुद्दे पर सियासत तेज हो गई है। घटना को लेकर कांग्रेस जहां सरकार पर हमलावर है। तो वही दूसरी तरफ आज लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी प्रभावित परिवारों से मिलने के लिए जलगा गांव पहुंचे और बुनियादी सुविधाओं की कमी को लेकर सरकार पर सवाल उठाए। तो वही इस बीच डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर राहुल गांधी के दौरे को “नाटकीय” बताते हुए तीखा हमला बोला।
3 महीने बाद पॉलिटिकल टूरिज्म के लिए आए राहुल
राजेंद्र शुक्ल ने कहा कि घटना के 3 महीने बाद राहुल पॉलिटिकल टूरिज्म के लिए आए। उसमे भी वो बेहद अगंभीर थे। शुल्क ने आगे कहा कि राहुल जी ने साबित कर दिया है कि है वो उसी कांग्रेस का नेतृत्व कर रहे हैं जिसके काम में नक्सलवाद को सबसे ज्यादा बढ़ावा मिला। UPA काल में नक्सलवाद खूब फला फूला है।
दिग्विजय की सरकार में गृहमंत्री को घर में घुसकर मार डाला
डिप्टी सीएम ने आगे कहा कि मध्यप्रदेश में नक्सलियों ने दिग्विजय सरकार के गृहमंत्री को घर में घुसकर मारा डाला था। जबकि बीजेपी के सरकार में नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में स्थिति बदली है और अब वहां सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा तथा मोबाइल नेटवर्क जैसी सुविधाएं पहुंचाई जा रही हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री जनमन योजना का जिक्र करते हुए आदिवासी समुदायों के लिए चल रहे विकास कार्यों की जानकारी दी।
सरकार बनेगी ये ख्याल छोड़ दीजिए
शुल्क ने कहा कि राहुल गांधी को प्रधानमंत्री जी को नक्सलमुक्त करने के लिए धन्यवाद करना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि मध्यप्रदेश की जनता 2003 के पहले का प्रदेश भूली नहीं है। आपकी सरकार बनेगी ये ख्याल छोड़ दीजिए।
नए आंगनवाड़ी केंद्र खोले गए
शुक्ल के मुताबिक, प्रभावित इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के साथ बच्चों और महिलाओं की स्क्रीनिंग भी कराई गई है। उन्होंने दावा किया कि नए आंगनवाड़ी केंद्र खोले गए हैं और स्वास्थ्य केंद्रों को अपग्रेड किया जा रहा है।
कांग्रेस शासन काल में मध्यप्रदेश बीमारू राज्य था
उन्होंने राहुल गांधी के उस बयान पर भी सवाल उठाया, जिसमें कांग्रेस नेता ने मामले को लोकसभा में उठाने की बात कही थी। शुक्ल ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष को संसद में अपनी भूमिका निभानी चाहिए। उन्होंने लाड़ली बहना योजना और प्रदेश के विकास को लेकर भी कांग्रेस पर निशाना साधा। साथ ही कहा कि कांग्रेस शासन काल में मध्यप्रदेश बीमारू राज्य था। लेकिन आज कई मामलों में मध्यप्रदेश नंबर 1 पर है।