दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर सामने आई एक गंभीर सुरक्षा चूक ने यात्रियों की निगरानी व्यवस्था और एयरलाइन के ऑपरेशनल सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं। तीन इटैलियन नागरिक बिना जरूरी इमिग्रेशन प्रक्रिया पूरी किए ही भारत से बाहर चले गए। मामला सामने आने के बाद नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने Air India को शो कॉज नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
मंत्रालय ने 12 सितंबर 2026 को एयर इंडिया के CEO को नोटिस भेजकर पूछा है कि यात्रियों को बिना इमिग्रेशन क्लीयरेंस के अंतरराष्ट्रीय उड़ान तक पहुंचने देने के लिए एयरलाइन के खिलाफ कार्रवाई क्यों न की जाए। एयर इंडिया को अपना जवाब देने के लिए सात दिन का समय दिया गया है।
अमृतसर से दिल्ली पहुंचे, फिर सीधे म्यूनिख रवाना
घटना 3 और 4 सितंबर की दरम्यानी रात की बताई जा रही है। तीनों इटैलियन यात्री अमृतसर से Air India की फ्लाइट AI-1115 के जरिए दिल्ली पहुंचे थे। फ्लाइट रात करीब 12:50 बजे दिल्ली एयरपोर्ट पर उतरी। इसके लगभग 55 मिनट बाद तीनों यात्री Lufthansa की फ्लाइट LH-763 से म्यूनिख के लिए रवाना हो गए। सवाल यह है कि भारत से बाहर जाने से पहले जिन यात्रियों की इमिग्रेशन जांच होनी चाहिए थी, वह प्रक्रिया पूरी ही नहीं हुई।
बोर्डिंग पास की प्रक्रिया से शुरू हुई गड़बड़ी?
नागरिक उड्डयन मंत्रालय के मुताबिक, हब एंड स्पोक व्यवस्था में यात्रियों की पहचान और उनके बोर्डिंग पास के आधार पर घरेलू तथा अंतरराष्ट्रीय यात्रियों को अलग-अलग प्रक्रिया से गुजरना होता है। इन यात्रियों को अमृतसर से दिल्ली के लिए Domestic यानी D बोर्डिंग पास जारी किया गया था। लेकिन इसके साथ ही उन्हें दिल्ली से म्यूनिख जाने वाली Lufthansa की फ्लाइट का बोर्डिंग पास भी अमृतसर में ही दे दिया गया। मंत्रालय का कहना है कि निर्धारित D-I Operations SOP में इस तरह तीसरे बोर्डिंग पास को जारी करने का प्रावधान नहीं है। माना जा रहा है कि इसी स्तर पर प्रक्रिया में गड़बड़ी शुरू हुई।
दिल्ली एयरपोर्ट पर इमिग्रेशन तक नहीं पहुंचे यात्री
दिल्ली पहुंचने के बाद इन यात्रियों को घरेलू यात्रियों की सामान्य प्रक्रिया से अलग कर इमिग्रेशन क्षेत्र में ले जाया जाना चाहिए था। विदेश जाने से पहले वहां उनका इमिग्रेशन क्लीयरेंस होना जरूरी था। लेकिन मंत्रालय के मुताबिक, यात्रियों को गेट नंबर 39 के जरिए इमिग्रेशन एरिया में भेजने के बजाय International-to-International Transfer Area की ओर ले जाया गया। इसके बाद तीनों यात्री सीधे डिपार्चर एरिया में पहुंच गए और म्यूनिख की फ्लाइट में सवार हो गए। यानी जिस चरण पर उनकी इमिग्रेशन जांच होनी थी, वे उस प्रक्रिया से गुजरे ही नहीं।
SOP के कई नियमों के पालन पर सवाल
मंत्रालय ने एयर इंडिया को भेजे नोटिस में D-I Operations SOP के कई प्रावधानों के उल्लंघन का उल्लेख किया है।
नियमों के मुताबिक बोर्डिंग पास और यात्रियों की श्रेणी के आधार पर Domestic और International यात्रियों की आवाजाही अलग रखी जानी चाहिए। इसके अलावा International-to-International Transfer Desk तक केवल पात्र अंतरराष्ट्रीय यात्रियों को जाने की अनुमति होनी चाहिए। मंत्रालय ने यह भी सवाल उठाया है कि हब और स्पोक एयरपोर्ट पर 24 घंटे तैनात नोडल अधिकारी और निगरानी टीम इस तरह की चूक को रोकने में सफल क्यों नहीं रही।
एयर इंडिया और SATS के कर्मचारियों की भूमिका पर भी सवाल
नोटिस में एयर इंडिया से यह स्पष्ट करने को कहा गया है कि यात्रियों को गलत ट्रांसफर एरिया तक पहुंचने से रोकने के लिए जिम्मेदार कर्मचारियों ने क्या कार्रवाई की। इसके अलावा यात्रियों की हैंडलिंग में शामिल Air India और SATS के कर्मचारियों की भूमिका, घटना के समय नोडल अधिकारी की मौजूदगी और निगरानी टीम की जिम्मेदारी को लेकर भी जानकारी मांगी गई है। मंत्रालय यह जानना चाहता है कि D बोर्डिंग पास वाले यात्री International-to-International Transfer Area तक कैसे पहुंच गए और उनकी पहचान के स्तर पर गलती किस चरण में हुई।
Passenger Manifest और API-PNR डेटा भी जांच के दायरे में
मामले में सिर्फ बोर्डिंग प्रक्रिया ही नहीं, बल्कि यात्रियों से जुड़े डिजिटल रिकॉर्ड की भी जांच की जा रही है। मंत्रालय ने पूछा है कि General Declaration, Passenger Manifest और API-PNR से जुड़ा डेटा इमिग्रेशन अधिकारियों को समय पर उपलब्ध कराया गया था या नहीं। इसके साथ यह भी स्पष्ट करने को कहा गया है कि इन तीनों यात्रियों की स्थिति संबंधित रिकॉर्ड में किस तरह दर्ज थी। सबसे अहम सवाल यही है कि यदि सिस्टम में यात्री घरेलू फ्लाइट से आए यात्रियों के रूप में दर्ज थे, तो वे बिना इमिग्रेशन क्लीयरेंस के अंतरराष्ट्रीय प्रस्थान क्षेत्र तक कैसे पहुंच गए।
मैनुअल जांच में सामने आई चूक
बताया गया है कि यह गड़बड़ी यात्रियों के रवाना होने से पहले सिस्टम की नियमित प्रक्रिया के जरिए नहीं पकड़ी जा सकी। बाद में मैनुअल मिलान के दौरान मामला सामने आया। इससे एयरपोर्ट पर यात्रियों की निगरानी, डेटा मिलान और घरेलू से अंतरराष्ट्रीय यात्रा के बीच सुरक्षा प्रोटोकॉल को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं।
एयर इंडिया को सात दिन में देना होगा जवाब
नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने एयर इंडिया से पूछा है कि SOP का पालन नहीं करने और जरूरी सावधानियां नहीं बरतने के लिए उसके खिलाफ नियामकीय कार्रवाई क्यों न की जाए। एयरलाइन को नोटिस प्राप्त होने के सात दिन के भीतर जवाब दाखिल करना है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित समय में जवाब नहीं मिलने पर उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा सकती है।