राष्ट्रीय राजधानी में पेपर लीक विरोध प्रदर्शन के दौरान RAF द्वारा पेलेट गन के इस्तेमाल को लेकर उठे विवाद के बीच CRPF के महानिदेशक (DG) ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह ने अपने जवानों को स्पष्ट संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने या किसी भी ऑपरेशन के दौरान जवान पूरी निडरता के साथ अपने कर्तव्यों का पालन करें। ड्यूटी के दौरान लिए गए हर निर्णय और कार्रवाई की जिम्मेदारी वह स्वयं डायरेक्टर जनरल के रूप में स्वीकार करेंगे।
सम्मान समारोह में जवानों को दिया भरोसा
CRPF के एक सम्मान समारोह को संबोधित करते हुए DG ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि चाहे ऑपरेशनल बटालियन हो या कानून-व्यवस्था संभालने वाली यूनिट, ड्यूटी के दौरान लिए गए फैसलों को लेकर जवान किसी तरह का भय न रखें।
उन्होंने कहा कि "ऑपरेशन के दौरान आप जो भी निर्णय लेंगे और जो भी कार्रवाई करेंगे, उसकी जवाबदेही डायरेक्टर जनरल के तौर पर मैं लूंगा। आप बिना किसी डर के अपना कर्तव्य निभाइए।"
RAF की कार्रवाई की होगी पेशेवर समीक्षा
दिल्ली में पेपर लीक विरोध प्रदर्शन के दौरान भीड़ को नियंत्रित करने के लिए RAF द्वारा पेलेट गन के इस्तेमाल के बाद इस कार्रवाई पर सवाल उठे थे। इस मामले में CRPF पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि पूरे घटनाक्रम की प्रोफेशनल पोस्ट-इवेंट असेसमेंट कराई जाएगी।
DG ने बताया कि किसी भी बड़े ऑपरेशन के बाद समीक्षा करना CRPF की स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) का नियमित हिस्सा है।
जांच में किन बिंदुओं पर होगा फोकस?
समीक्षा के दौरान कई महत्वपूर्ण पहलुओं की जांच की जाएगी, जिनमें शामिल हैं—
किन परिस्थितियों में पेलेट गन का इस्तेमाल किया गया।
क्या कार्रवाई निर्धारित SOP और नियमों के अनुरूप थी।
मौके पर मौजूद अधिकारियों ने कौन-कौन से निर्णय लिए।
भीड़ नियंत्रण के लिए बल प्रयोग आवश्यक परिस्थितियों में किया गया था या नहीं।
देशभर में कानून-व्यवस्था संभालती है CRPF
CRPF देश का सबसे बड़ा केंद्रीय अर्धसैनिक बल है, जो राज्यों की पुलिस के साथ मिलकर कानून-व्यवस्था बनाए रखने, दंगा नियंत्रण, चुनाव ड्यूटी और आंतरिक सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण दायित्व निभाता है। इसकी रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) विशेष रूप से दंगा नियंत्रण और भीड़ प्रबंधन के लिए प्रशिक्षित है, जबकि CoBRA इकाइयां नक्सल प्रभावित इलाकों में माओवादी विरोधी अभियानों में अहम भूमिका निभाती हैं।
मणिपुर ऑपरेशन भी रहा था चर्चा में
इससे पहले नवंबर 2024 में मणिपुर के जिरीबाम जिले में CRPF की कार्रवाई भी सुर्खियों में रही थी। उस दौरान सुरक्षा बलों ने मुठभेड़ में 10 संदिग्ध कुकी उग्रवादियों को मार गिराया था। घटना को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए थे। सुरक्षा एजेंसियों ने मारे गए लोगों को उग्रवादी बताया था, जबकि कुकी समुदाय ने उन्हें स्वयंसेवक होने का दावा किया था।