रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने शासकीय कर्मचारियों से जुड़े विभागीय जांच (Departmental Inquiry) और अनुशासनात्मक कार्रवाई के मामलों में महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, यदि किसी शासकीय सेवक की विभागीय जांच या अनुशासनात्मक कार्रवाई के दौरान मृत्यु हो जाती है, तो उसके खिलाफ लंबित पूरी कार्रवाई स्वतः समाप्त मानी जाएगी।
विभागीय जांच पर सरकार का स्पष्ट रुख
सरकार ने आदेश में कहा है कि यह प्रावधान उन मामलों पर भी लागू होगा, जिनमें सरकारी धन के गबन, वित्तीय अनियमितता, शासकीय राशि की वसूली या अन्य अनुशासनात्मक आरोपों की जांच चल रही हो। कर्मचारी की मृत्यु के बाद ऐसी जांच को आगे नहीं बढ़ाया जाएगा।
हालांकि, यदि कर्मचारी के जीवित रहते हुए सक्षम प्राधिकारी द्वारा वसूली या दंड से संबंधित अंतिम आदेश पहले ही जारी किया जा चुका है, तो नियमानुसार उसकी देय राशि अथवा अन्य वैधानिक स्वत्वों से वसूली की जा सकेगी।
2012 के परिपत्र का दिया गया संदर्भ
सामान्य प्रशासन विभाग ने 13 जुलाई 2026 को जारी आदेश में वर्ष 2012 के पूर्व जारी परिपत्र का उल्लेख करते हुए यह स्पष्टीकरण दिया है। आदेश के अनुसार यह व्यवस्था छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1966 तथा छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (पेंशन) नियम, 1976 के प्रावधानों के अनुरूप लागू होगी।
इन नियमों के तहत यदि कोई सेवारत या सेवानिवृत्त शासकीय कर्मचारी विभागीय जांच लंबित रहने के दौरान निधन हो जाता है, तो उसके विरुद्ध चल रही अनुशासनात्मक कार्रवाई समाप्त मानी जाएगी।
सभी विभागों को पालन के निर्देश
राज्य सरकार ने यह आदेश सभी विभागाध्यक्षों, संभागायुक्तों, कलेक्टरों, जिला पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों और अन्य संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों को भेजा है। निर्देश में कहा गया है कि पूरे राज्य में इस व्यवस्था का एक समान पालन सुनिश्चित किया जाए, ताकि ऐसे मामलों में निर्णय लेने में एकरूपता बनी रहे।
किन मामलों में होगी वसूली?
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि किसी कर्मचारी के विरुद्ध उसके जीवनकाल में विधिवत दंडादेश या सरकारी राशि की वसूली का आदेश पारित हो चुका है, तो उसकी मृत्यु के बाद भी नियमों के तहत देयकों से वसूली की जा सकेगी। लेकिन यदि केवल जांच लंबित थी और अंतिम आदेश जारी नहीं हुआ था, तो कर्मचारी की मृत्यु के साथ ही विभागीय कार्रवाई समाप्त मानी जाएगी।