रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से शुक्रवार, 20 फरवरी से प्रदेशभर में “चावल उत्सव” की शुरुआत की जा रही है। इस अभियान के तहत शासकीय उचित मूल्य की दुकानों में फरवरी और मार्च दो माह का चावल एक साथ वितरित किया जाना है। लेकिन जमीनी स्तर पर तैयारियां अधूरी नजर आ रही हैं। कई राशन दुकानों में अब तक पर्याप्त चावल का भंडारण नहीं हो पाया है, जिससे हितग्राहियों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
दो माह का कोटा एक साथ देने का निर्णय
खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग ने आदेश जारी कर 20 फरवरी से प्रदेश की सभी उचित मूल्य दुकानों में फरवरी और मार्च का चावल एक साथ वितरित करने के निर्देश दिए हैं। पहले यह कार्यक्रम 1 फरवरी से प्रस्तावित था, लेकिन सॉफ्टवेयर में तकनीकी गड़बड़ी के कारण इसे टालना पड़ा। सूत्रों के मुताबिक, ऑनलाइन सिस्टम में किसी कार्डधारक का एक माह तो किसी का दो माह का राशन शो हो रहा था। इस विसंगति को दूर करने के बाद अब 20 फरवरी से संयुक्त वितरण का निर्णय लिया गया है।
परिवहन एजेंसियों को 6 माह से भुगतान नहीं:
राशन आपूर्ति में सबसे बड़ी बाधा परिवहन व्यवस्था बनी हुई है। जानकारी के अनुसार, पिछले छह महीनों से ट्रांसपोर्ट एजेंसियों को विभाग की ओर से भुगतान नहीं किया गया है। इसी वजह से एजेंसियां अनुबंध के अनुरूप पर्याप्त संख्या में वाहन उपलब्ध नहीं करा रही हैं। सूत्र बताते हैं कि परिवहन विभाग के वाट्सऐप ग्रुप में एक एजेंसी संचालक ने लंबित भुगतान का मुद्दा उठाते हुए स्पष्ट कहा है कि बकाया राशि मिलने तक वाहनों की संख्या नहीं बढ़ाई जाएगी। इसका सीधा असर नागरिक आपूर्ति निगम के गोदामों से राशन दुकानों तक माल पहुंचाने पर पड़ रहा है।
चावल के साथ शक्कर-नमक की सप्लाई भी प्रभावित:
वाहनों की कमी का असर सिर्फ चावल पर ही नहीं, बल्कि शक्कर और नमक की सप्लाई पर भी पड़ा है। कई दुकानों में डीओ (डिलीवरी ऑर्डर) जमा होने के बावजूद भंडारण नहीं हो पाया है। दुकान संचालक लगातार गोदामों से संपर्क कर रहे हैं, लेकिन गाड़ियों की कमी का हवाला देकर आपूर्ति टाली जा रही है।
रायपुर समेत कई जिलों में अव्यवस्था:
राजधानी रायपुर सहित प्रदेश के कई जिलों में नान गोदामों से दुकानों तक पर्याप्त आपूर्ति नहीं हो पाई है। ऐसे में दो माह का चावल एक साथ वितरण करने की योजना पर सवाल उठने लगे हैं। आशंका है कि कई हितग्राहियों को एक माह का राशन भी समय पर नहीं मिल पाएगा।
हितग्राहियों और संचालकों की बढ़ेगी परेशानी:
यदि समय पर भंडारण नहीं हुआ तो कार्डधारकों को राशन दुकान और गोदाम के चक्कर लगाने पड़ सकते हैं। वहीं, दुकान संचालकों पर भी हितग्राहियों के दबाव का सामना करना पड़ेगा। सरकार की मंशा जहां उत्सव के रूप में एक साथ वितरण की है, वहीं जमीनी हकीकत में लॉजिस्टिक चुनौतियां बड़ी बाधा बनती दिख रही हैं। “छत्तीसगढ़ चावल उत्सव 2026” का उद्देश्य हितग्राहियों को राहत देना है, लेकिन परिवहन भुगतान, सॉफ्टवेयर गड़बड़ी और भंडारण की अव्यवस्था जैसे मुद्दे योजना की सफलता पर असर डाल सकते हैं। अब निगाहें इस पर टिकी हैं कि प्रशासन इन चुनौतियों को कितनी तेजी से दूर कर पाता है।