नागदा, राकेश कानूनगो: बड़नगर के झलारिया गांव में मासूम भागीरथ की बोरवेल में गिरने से हुई मौत ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया, लेकिन नागदा और इसके ग्रामीण इलाकों में जिम्मेदार अब भी गहरी नींद में हैं। सुप्रीम कोर्ट के सख्त निर्देशों और बार-बार होते हादसों के बावजूद, नागदा शहर से लेकर गांवों तक खुले बोरवेल मासूमों की जान के दुश्मन बने हुए हैं। शनिवार को जब हमारी टीम ने धरातल पर पड़ताल की, तो सुरक्षा के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति और भारी लापरवाही का मंजर नजर आया।
जहां मौत दे रही है दस्तक
दोपहर 2:30 बजे (चंद्रशेखर आजाद मार्ग, नागदा): शहर के बीचों-बीच सड़क पर ही एक बोरिंग खुला मिला। सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार प्लेटफॉर्म तो बना, पर वह टूट चुका है और ढक्कन नदारद है। स्थानीय लोगों ने इसे प्लास्टिक की चद्दर से ढका है, जिसे खेलते हुए बच्चे आसानी से हटा सकते हैं।
दोपहर 3:30 बजे (ग्राम पाड़सुत्या): यहां नई आबादी में एक सक्रिय बोरिंग मिला। लोहे का पाइप जमीन से ऊंचा तो है, लेकिन ऊपर से पूरी तरह खुला है। यहाँ ढक्कन लगाने की जहमत किसी ने नहीं उठाई।
शाम 4:30 बजे (अमलावदिया): यहां नियमों का पालन दिखाने की कोशिश तो हुई, लेकिन वह भी खोखली निकली। पीवीसी पाइप पर पत्थर रखा था, जिसे हटाते ही पाइप आसानी से बाहर आ गया। यानी सुरक्षा के नाम पर केवल धोखा।
शाम 5:00 बजे (लसुड़िया जयसिंह): तालाब के पास जहां बच्चे खेल रहे थे, वहीं एक सक्रिय बोरिंग मिला। ढक्कन की जगह उसे बोरी से बांधकर पत्थर रख दिया गया था। ग्रामीणों ने बताया कि मोटर जलने के बाद इसे ऐसे ही छोड़ दिया गया।
शाम 5:30 बजे (लसुड़िया जयसिंह गांव के बीच): घरों के बीच खाली प्लॉट पर एक सरकारी बोरिंग जमीन के समानांतर खुला मिला। यहां भी केवल एक पत्थर रखकर इतिश्री कर ली गई।
सुप्रीम कोर्ट के नियमों की सरेआम धज्जियां
विभागीय लापरवाही का आलम यह है कि सरकारी महकमा खुद के कराए बोरिंग सुरक्षित नहीं कर पा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में PHE विभाग और शहरी क्षेत्रों में नगर पालिका ठेकेदारों से पुख्ता काम कराने में नाकाम रहे हैं। केसिंग पाइप जमीन से 0.30 मीटर ऊंचा हो, कंक्रीट का प्लेटफॉर्म हो, स्टील प्लेट से वेल्डिंग हो और पास में चेतावनी बोर्ड लगा हो। ढक्कन की जगह बोरी, वेल्डिंग की जगह पत्थर और चेतावनी बोर्ड का नामोनिशान तक नहीं।
दोषियों पर हो सकती है 10 साल तक की जेल
नियमों के मुताबिक, बोरवेल खुला छोड़ने पर जमीन मालिक और ठेकेदार पर पुलिस केस दर्ज हो सकता है। इसमें 2 से 10 साल तक की सजा और भारी अर्थदंड का प्रावधान है, लेकिन कागजों में दफन इन नियमों का खौफ लापरवाही बरतने वालों में नहीं दिख रहा।
अब बैठकों का दौर
मामले की गंभीरता को देखते हुए एसडीएम रंजना पाटीदार ने बताया कि राजस्व विभाग के पटवारियों को अपने-अपने क्षेत्रों की तत्काल रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं। सीएमओ और जनपद पंचायत सीईओ को भी निर्देशित किया जा रहा है कि वे पंचायत सचिवों की बैठक लें और सुनिश्चित करें कि कोई भी बोरवेल खुला न रहे।