आदिवासी बच्चों की लगातार हो रही मौतों और स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति को लेकर कांग्रेस ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। जिला कांग्रेस कमेटी और आदिवासी कांग्रेस की ओर से आयोजित पत्रकार वार्ता में इस पूरे मामले को लेकर सरकार पर गंभीर सवाल उठाए गए। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि बीमारी की रोकथाम और प्रभावित परिवारों को समय पर इलाज उपलब्ध कराने में शासन-प्रशासन नाकाम रहा है।
पत्रकार वार्ता में जिला कांग्रेस अध्यक्ष हरिश कवासी और आदिवासी कांग्रेस अध्यक्ष वेको हूंगा ने कहा कि आदिवासी इलाकों में स्वास्थ्य व्यवस्था की स्थिति बेहद चिंताजनक है। उनके मुताबिक, मलेरिया, डायरिया और कुपोषण जैसी समस्याओं के बीच बड़ी संख्या में बच्चों की मौत हुई है।
कई महीनों से बच्चों की मौत का दावा
कांग्रेस नेताओं ने दावा किया कि 18 मई को एक बच्चे की मौत के बाद बच्चों की मौत का सिलसिला लगातार जारी रहा। उनके अनुसार, करीब चार महीने की अवधि में मलेरिया, डायरिया और कुपोषण से लगभग 30 आदिवासी बच्चों की जान गई।
कांग्रेस ने इस स्थिति को स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर विफलता बताते हुए सरकार से तत्काल प्रभावी कदम उठाने की मांग की है।
जिला मुख्यालयों पर ‘न्याय सत्याग्रह’
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि इस मामले को राष्ट्रीय स्तर पर उठाए जाने के बावजूद सरकार की ओर से अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई। इसके विरोध में आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. विक्रांत भूरिया के निर्देश पर देशभर के जिला मुख्यालयों में एक दिवसीय ‘न्याय सत्याग्रह’ आयोजित किया जा रहा है।
कांग्रेस का कहना है कि इस सत्याग्रह के जरिए आदिवासी परिवारों को न्याय दिलाने और स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार की मांग को मजबूती से उठाया जाएगा।
आदिवासी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं पर सवाल
हरिश कवासी और वेको हूंगा ने कहा कि यह मामला केवल बच्चों की मौत तक सीमित नहीं है, बल्कि आदिवासी समाज के स्वास्थ्य अधिकार और सरकारी जवाबदेही से जुड़ा हुआ है।
उन्होंने कहा कि दूरदराज के आदिवासी इलाकों में अस्पतालों की कमी, डॉक्टरों की अनुपलब्धता, दवाइयों की कमी और आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की सीमित पहुंच के कारण लोगों को समय पर इलाज नहीं मिल पाता। इसका सबसे ज्यादा असर गरीब और दूरस्थ ग्रामीण परिवारों पर पड़ता है।
कांग्रेस ने सरकार के सामने रखीं तीन मांगें
पत्रकार वार्ता के दौरान कांग्रेस नेताओं ने सरकार के सामने तीन प्रमुख मांगें रखीं। इनमें—
स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला के इस्तीफे की मांग।
बालाघाट में हेल्थ इमरजेंसी घोषित करने की मांग।
मृत बच्चों के प्रत्येक परिवार को एक करोड़ रुपये मुआवजा देने की मांग।
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि सरकार को मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल निर्णय लेना चाहिए।
‘सिर्फ जांच से नहीं मिलेगा न्याय’
कांग्रेस ने कहा कि केवल औपचारिक जांच या अधिकारियों के बयान से पीड़ित परिवारों की समस्या का समाधान नहीं होगा। पार्टी ने प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को तत्काल मजबूत करने और बच्चों की मौत के कारणों की गंभीरता से जांच कराने की मांग की। नेताओं का कहना है कि सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि भविष्य में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी के कारण किसी परिवार को अपने बच्चे को न खोना पड़े।
आदिवासी परिवारों के लिए बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था की मांग
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि आदिवासी बहुल इलाकों में रहने वाले लोगों को भी अन्य क्षेत्रों की तरह बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिलनी चाहिए। दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य केंद्रों, डॉक्टरों, दवाइयों और आपातकालीन सेवाओं की उपलब्धता बढ़ाना जरूरी है। वेको हूंगा ने कहा कि कांग्रेस पीड़ित परिवारों के न्याय और उचित मुआवजे की मांग को आगे भी उठाती रहेगी। पार्टी ने सरकार से प्रभावित इलाकों में तत्काल स्वास्थ्य सेवाएं मजबूत करने और मृत बच्चों के परिवारों को राहत देने की मांग दोहराई है।