बालाघाट: मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के बिरसा ब्लॉक में बच्चों की मौत का मामला अब आंदोलन का रूप ले चुका है। बच्चों की मौतों को लेकर आदिवासी समाज में भारी नाराजगी है। इसी के विरोध में आदिवासी संगठनों ने शुक्रवार को बालाघाट बंद का आह्वान किया। बंद का असर शहर के बाजारों में देखने को मिला और कई दुकानें बंद रहीं।
बंद के दौरान आदिवासी समाज के बड़ी संख्या में लोग बालाघाट पहुंचे। संगठनों ने शहर में विरोध रैली निकाली और इसके बाद कलेक्ट्रेट पहुंचकर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने बच्चों की मौत के मामले में गंभीरता से जांच कराने, जिम्मेदार लोगों की पहचान करने और लापरवाही सामने आने पर सख्त कार्रवाई की मांग की।
बालाघाट बंद का बाजारों पर असर
बिरसा ब्लॉक में बच्चों की मौतों के विरोध में बुलाए गए बंद का असर सुबह से ही दिखाई देने लगा। शहर के कई बाजारों में दुकानें बंद रहीं। सामान्य दिनों की तुलना में सड़कों पर भी कम आवाजाही देखने को मिली।
बंद के बीच आदिवासी संगठनों के नेता और कार्यकर्ता लगातार शहर में पहुंचते रहे। दोपहर तक बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी में विरोध सभा आयोजित की गई। सभा में वक्ताओं ने बच्चों की मौत के मामले को गंभीर बताते हुए प्रशासन से पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की।
आदिवासी संगठनों ने निकाली विरोध रैली
सभा के बाद आदिवासी संगठनों ने बालाघाट शहर में विरोध रैली निकाली। रैली में बड़ी संख्या में महिला-पुरुष और संगठन के कार्यकर्ता शामिल हुए। प्रदर्शनकारी हाथों में बैनर और तख्तियां लेकर नारेबाजी करते हुए आगे बढ़े।
रैली का मुख्य मुद्दा बिरसा क्षेत्र में बच्चों की मौत और आदिवासी इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति रहा। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि दूरस्थ आदिवासी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर गंभीर चुनौतियां हैं, जिन पर प्रशासन को तत्काल ध्यान देना चाहिए।
कलेक्ट्रेट के सामने किया प्रदर्शन
विरोध रैली कलेक्ट्रेट पहुंची, जहां आदिवासी समाज और संगठनों के लोगों ने प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगों को प्रशासन के सामने रखा और बच्चों की मौत के मामले में जिम्मेदारी तय करने की मांग की।
आदिवासी संगठनों का कहना है कि पूरे मामले की केवल औपचारिक जांच पर्याप्त नहीं होगी। उनका कहना है कि जांच के दौरान यदि किसी अधिकारी या स्वास्थ्य व्यवस्था से जुड़े व्यक्ति की लापरवाही सामने आती है तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।
स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर भी नाराजगी
प्रदर्शन के दौरान आदिवासी बहुल क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर भी सवाल उठाए गए। संगठनों ने मांग की कि ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत किया जाए, ताकि गंभीर स्थिति में मरीजों और खासकर बच्चों को समय पर इलाज मिल सके। बालाघाट में बंद और प्रदर्शन के बाद अब इस मामले में प्रशासन की कार्रवाई पर नजर बनी हुई है। आदिवासी संगठनों ने बच्चों की मौत के मामले में जवाबदेही तय करने और प्रभावित परिवारों को न्याय दिलाने की मांग दोहराई है।