लोकेशन: छतरपुर (मध्यप्रदेश)
संवाददाता: विनोद मिश्रा | मो. 9584667429
Bageshwar Dham Kanya Vivah Mahotsav : छतरपुर बागेश्वर धाम में आयोजित 10 दिवसीय सप्तम कन्या विवाह महोत्सव ने इस वर्ष अंतरराष्ट्रीय पहचान हासिल कर ली है। पीठाधीश्वर पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने मीडिया से बातचीत में बताया कि आयोजन में अमेरिका सहित आठ देशों के राजदूत, देशभर के संत-महात्मा और कई विशिष्ट अतिथि शामिल होंगे। महोत्सव के तहत 13 से 15 फरवरी तक विभिन्न वैदिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
तीन दिन के प्रमुख कार्यक्रम
महोत्सव की शुरुआत 13 फरवरी को हल्दी रस्म से होगी, 14 फरवरी को मेहंदी कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा और 15 फरवरी को वैदिक मंत्रोच्चार के साथ सामूहिक विवाह संपन्न कराया जाएगा। दूर-दराज से आने वाली कन्याओं को एक दिन पूर्व ही बुलाया गया है, ताकि उन्हें किसी प्रकार की असुविधा न हो।
उपहार और 30 हजार रुपये की एफडी
विवाह में शामिल प्रत्येक जोड़े को बागेश्वर धाम की ओर से धार्मिक ग्रंथ, भगवान श्री बालमुकुंद और बालाजी सरकार के विग्रह, रामचरितमानस, वस्त्र, आभूषण, घरेलू उपयोग की सामग्री, एलईडी टीवी, सिलाई मशीन, गैस चूल्हा और फर्नीचर सहित अनेक उपहार दिए जाएंगे। इसके साथ ही प्रत्येक जोड़े के संयुक्त नाम से 30 हजार रुपये की एफडी भी कराई जाएगी।
घोड़ी पर पहुंचेगी बारात, विशाल भंडारा
15 फरवरी को दूल्हे घोड़ी पर सवार होकर गाजे-बाजे के साथ विवाह स्थल पहुंचेंगे। 50-50 जोड़ों के समूह में वरमाला के बाद वैदिक रीति-रिवाज से विवाह संस्कार संपन्न होंगे। घराती और बारातियों के लिए विशाल भंडारे की व्यवस्था की जा रही है। किन्नर समाज भी आयोजन में विशेष रूप से शामिल होगा।
302 बेटियों का चयन, नेपाल सहित 10 राज्यों से सहभागिता
महोत्सव के लिए कुल 1648 आवेदन प्राप्त हुए थे। जांच के बाद 1233 आवेदन सही पाए गए, जिनमें से अंतिम रूप से 302 बेटियों का चयन किया गया। इनमें अनाथ, दिव्यांग, पितृहीन और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की बेटियां शामिल हैं। मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, दिल्ली, महाराष्ट्र, राजस्थान, बिहार, झारखंड, हरियाणा, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़ और नेपाल से प्रतिभागी इस आयोजन का हिस्सा बन रही हैं।
विशिष्ट अतिथियों की मौजूदगी
मलूक पीठाधीश्वर राजेंद्र दास देवाचार्य महाराज ने आयोजन की सराहना करते हुए इसे सनातन संस्कृति के उत्थान का माध्यम बताया। असम के राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य ने कहा कि बागेश्वर धाम सामाजिक परिवर्तन का केंद्र बनकर उभर रहा है और यहां बेटियों के सम्मान का संदेश दिया जा रहा है।
वैदिक गुरुकुलम का शुभारंभ
13 फरवरी को आरोग्य आस्था केंद्र के साथ शिक्षा क्षेत्र में नई पहल के तहत वैदिक गुरुकुलम का शुभारंभ भी किया जाएगा। गुजरात के संत रमेश भाई ओझा और सीहोर के प्रदीप मिश्रा की उपस्थिति में काशी से नियुक्त आचार्यों के मार्गदर्शन में यह शुरुआत होगी।
धार्मिक अनुष्ठान और भावुक पल
12 फरवरी को सुबह 7 बजे से सवा लाख हनुमान चालीसा एवं सुंदरकांड पाठ का आयोजन हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। मंच से चयनित कन्याओं के घरों की वास्तविक स्थिति दर्शाने वाली शॉर्ट फिल्म दिखाई गई, जिसे देखकर कई अतिथि भावुक हो उठे।
चढ़ोतरी से होता है आयोजन
पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि मंदिर में आने वाली चढ़ोतरी और समाज से प्राप्त सहयोग राशि का उपयोग गरीब बेटियों के विवाह जैसे सामाजिक कार्यों में किया जाता है। उन्होंने अन्य धार्मिक संस्थाओं से भी इस दिशा में आगे आने का आह्वान किया। फिलहाल बागेश्वर धाम में विवाह मंडप सजाए जा रहे हैं और लाखों श्रद्धालुओं की मौजूदगी में यह आयोजन अपने चरम पर पहुंच चुका है।