बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन से जुड़े एक पुराने मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने समझौते की प्रक्रिया पूरी करने के लिए अतिरिक्त समय दिया है। अदालत ने अभिनेता को 16 नवंबर 2026 तक की मोहलत दी है। मामला उनके नाम, तस्वीर और आवाज के कथित अनधिकृत इस्तेमाल से जुड़ा है।
सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि विवाद को आपसी सहमति से सुलझाने के लिए बातचीत हुई है। कुछ पक्षों और कंपनियों के साथ समझौता भी हो चुका है, लेकिन इससे जुड़ी जरूरी औपचारिकताएं अभी पूरी नहीं हुई हैं। ऐसे में अदालत ने समझौते की प्रक्रिया पूरी करने के लिए समय बढ़ा दिया।
16 नवंबर तक समझौता पूरा करने का निर्देश
यह निर्देश शुक्रवार को जस्टिस पुरुषैंद्र कुमार कौरव की पीठ ने सुनवाई के दौरान दिया। अमिताभ बच्चन की ओर से पेश वकील ध्रुव आनंद ने अदालत से समझौते से जुड़ी प्रक्रिया पूरी करने के लिए अतिरिक्त समय देने का अनुरोध किया था।
अदालत ने इस मांग को स्वीकार करते हुए 16 नवंबर 2026 तक का समय दिया है। साथ ही स्पष्ट किया कि यदि तय समयसीमा तक समझौता पूरा नहीं होता है, तो मामले में आगे की सुनवाई की जाएगी और अमिताभ बच्चन को अगली सुनवाई पर व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होना होगा।
क्या है अमिताभ बच्चन से जुड़ा पूरा मामला?
अमिताभ बच्चन ने वर्ष 2022 में दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उनकी याचिका में आरोप लगाया गया था कि कुछ लोग उनकी अनुमति के बिना उनके नाम, तस्वीर और आवाज का इस्तेमाल कर रहे हैं।
याचिका के मुताबिक, कुछ मोबाइल ऐप संचालक अभिनेता का नाम जोड़कर ‘कौन बनेगा करोड़पति’ (KBC) से संबंधित लॉटरी और अन्य गतिविधियों का प्रचार कर रहे थे। इसके अलावा, किताबें प्रकाशित करने वाले, टी-शर्ट बेचने वाले और अन्य कारोबारी भी कथित तौर पर उनकी पहचान का इस्तेमाल कर रहे थे। अभिनेता ने अदालत से मांग की थी कि उनकी पहचान और लोकप्रियता का इस्तेमाल बिना अनुमति किए जाने पर रोक लगाई जाए।
2022 में ही हाईकोर्ट ने दी थी राहत
नवंबर 2022 में दिल्ली हाईकोर्ट ने अमिताभ बच्चन के नाम, तस्वीर और आवाज का बिना अनुमति इस्तेमाल करने वालों के खिलाफ रोक लगाने का आदेश दिया था। अदालत ने उस समय माना था कि किसी लोकप्रिय व्यक्ति की पहचान का इस्तेमाल व्यावसायिक लाभ के लिए किया जा सकता है और इससे उसकी छवि तथा प्रतिष्ठा प्रभावित होने का खतरा रहता है। अब इसी मामले में समझौते की प्रक्रिया को लेकर नई सुनवाई हुई है। अदालत की ओर से दी गई समयसीमा के बाद यह स्पष्ट होगा कि विवाद आपसी सहमति से सुलझता है या मामले में आगे कानूनी कार्यवाही जारी रहती है।