रायपुर। बलौदाबाजार हिंसा प्रकरण में छत्तीसगढ़ क्रांति सेना के प्रदेश अध्यक्ष अमित बघेल को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। सर्वोच्च अदालत ने उनकी जमानत याचिका स्वीकार करते हुए उन्हें रिहा करने का आदेश दिया। इसी मामले में सह-आरोपी अजय यादव और दिनेश वर्मा को भी अदालत ने जमानत प्रदान की है।
चार्जशीट दाखिल होने को माना अहम आधार
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि आरोपी की न्यायिक हिरासत की अवधि अभी अधिक नहीं हुई है। वहीं बचाव पक्ष ने दलील दी कि मामले की जांच पूरी हो चुकी है और चार्जशीट अदालत में पेश की जा चुकी है।
दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जब जांच पूरी हो चुकी है और चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है, तब आरोपी को अनिश्चितकाल तक जेल में रखना उचित नहीं माना जा सकता। अदालत ने इसी आधार पर हाईकोर्ट के आदेश को निरस्त करते हुए जमानत मंजूर कर ली।
पहले भी दूसरे मामले में मिली थी राहत
जानकारी के मुताबिक, अमित बघेल को इससे पहले रायपुर में दर्ज एक अन्य मामले में भी जमानत मिल चुकी है। उस प्रकरण में उन पर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी करने का आरोप लगाया गया था।
क्या है पूरा मामला?
10 जून 2024 को बलौदाबाजार के दशहरा मैदान में आयोजित एक प्रदर्शन के दौरान हालात हिंसक हो गए थे। आरोप है कि प्रदर्शन के बाद भीड़ ने कलेक्टोरेट और पुलिस अधीक्षक कार्यालय परिसर में तोड़फोड़ की और कई वाहनों में आग लगा दी। घटना के दौरान पुलिसकर्मियों पर हमले की भी शिकायत दर्ज हुई थी। इस मामले में पुलिस ने अमित बघेल सहित कई लोगों को आरोपी बनाया था और विभिन्न धाराओं में प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू की थी।
आगे भी जारी रहेगी कानूनी प्रक्रिया
सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने के बावजूद मामले की सुनवाई निचली अदालत में जारी रहेगी। अदालत का यह आदेश केवल जमानत से संबंधित है, जबकि मामले के गुण-दोष पर अंतिम फैसला ट्रायल के बाद ही होगा।