भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए नगर निगम ने फायर सेफ्टी नियमों का पालन नहीं करने वाले कोचिंग संस्थानों के खिलाफ बड़ा अभियान शुरू कर दिया है। मंगलवार से ऐसे 31 कोचिंग संस्थानों को सील करने की कार्रवाई की जाएगी जिन्होंने प्रशासन की ओर से जारी नोटिस के बावजूद आवश्यक दस्तावेज और फायर सुरक्षा योजना जमा नहीं की। नगर निगम के अधिकारियों के अनुसार, कुल 61 कोचिंग संस्थानों को नोटिस जारी किए गए थे। इनमें से केवल 30 संस्थानों ने समय सीमा के भीतर शपथ पत्र और फायर सेफ्टी प्लान जमा किया, जबकि बाकी 31 संस्थानों ने निर्धारित नियमों का पालन नहीं किया।
फायर सेफ्टी प्लान जमा करने के दिए गए थे निर्देश
नगर निगम ने सभी कोचिंग संचालकों को 200 रुपये के न्यायिक स्टाम्प पर शपथ पत्र के साथ फायर सेफ्टी प्लान जमा करने के निर्देश दिए थे। इसके लिए सोमवार अंतिम तिथि निर्धारित की गई थी। अधिकारियों ने कई संचालकों से फोन पर संपर्क भी किया, लेकिन कुछ संचालकों ने कोचिंग बंद होने की जानकारी दी। समय सीमा पूरी होने के बाद अब नियमों का पालन नहीं करने वाले संस्थानों पर सीधी कार्रवाई की जाएगी।
नियमों का पालन करने वालों को मिला एक महीने का समय
नगर निगम मुख्यालय में आयोजित उच्च स्तरीय बैठक में 20 बिंदुओं वाली फायर सेफ्टी गाइडलाइन सभी संस्थानों को सौंपी गई थी। जिन संस्थानों ने समय पर दस्तावेज जमा कर दिए हैं, उन्हें सुरक्षा संबंधी कमियां दूर करने के लिए एक महीने की मोहलत दी गई है। इस अवधि में संबंधित संस्थान कोचिंग कक्षाएं संचालित नहीं कर सकेंगे। साथ ही 15 दिनों के भीतर सुधार कार्यों की प्रगति रिपोर्ट भी निगम को सौंपनी होगी।
नई फायर सेफ्टी गाइडलाइन में क्या है अनिवार्य?
नगर निगम द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार बेसमेंट का उपयोग केवल पार्किंग या स्टोर के लिए होगा। 200 वर्गमीटर से बड़े बेसमेंट में स्प्रिंकलर सिस्टम अनिवार्य रहेगा। दो इमरजेंसी एग्जिट की व्यवस्था जरूरी होगी। ऑटोमैटिक फायर अलार्म और स्मोक डिटेक्शन सिस्टम लगाना होगा। पर्याप्त फायर एक्सटिंग्विशर और फ्यूम मास्क उपलब्ध रखने होंगे नियमित फायर एवं इलेक्ट्रिकल ऑडिट कराना अनिवार्य रहेगा। हर चार महीने में मॉक ड्रिल और कर्मचारियों को फायर सेफ्टी ट्रेनिंग देना होगी।
स्कूल वाहनों की जांच में भी सामने आई लापरवाही
इधर, पूरे मध्य प्रदेश में चलाए जा रहे विशेष अभियान के दौरान स्कूल वाहनों की जांच में भी कई खामियां सामने आई हैं। 8 जुलाई से शुरू हुए अभियान के पहले पांच दिनों में 1,926 स्कूल बसों और अन्य वाहनों की जांच की गई। इनमें से 505 वाहन सुरक्षा मानकों पर खरे नहीं उतरे। जांच के दौरान कई वाहनों में फायर एक्सटिंग्विशर, फर्स्ट एड बॉक्स, इमरजेंसी एग्जिट और आवश्यक दस्तावेजों की कमी पाई गई। सभी दोषी वाहनों के खिलाफ मोटरयान अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई। एडीजी पीटीआरआई शाहिद अबसार के अनुसार, इस अभियान का उद्देश्य केवल चालान करना नहीं बल्कि स्कूली बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। यह विशेष अभियान 17 जुलाई तक जारी रहेगा।