'storm-proof' solar city: दुनिया तेजी से बदल रही है और इंसानी जीवनशैली भी अब शहर केवल कंक्रीट और सड़कों का नाम नहीं रहे, बल्कि वे प्रकृति के साथ तालमेल की मिसाल बनते जा रहे हैं. अमेरिका के फ्लोरिडा में बसा बैबकॉक रैंच ऐसा ही एक शहर है, जिसे दुनिया की पहली 100% सोलर एनर्जी से चलने वाली सिटी कहा जाता है। इस शहर की सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यहां सड़कों पर बिजली का एक भी खंभा नजर नहीं आता, लोगों के घरों में बिजली का बिल नहीं आता और 250 किमी प्रति घंटे की रफ्तार वाले तूफान में भी एक भी लाइट बंद नहीं हुई।
कभी जंगल और चारागाह था, आज बना ‘होमटाउन ऑफ टुमॉरो’:
जहां आज बैबकॉक रैंच खड़ा है, वहां कभी चरवाहों और शिकारियों के अलावा कोई नहीं जाता था. चारों तरफ जंगल और जंगली जानवरों का डर था. लेकिन साल 2006 में एक पूर्व फुटबॉल खिलाड़ी से रियल एस्टेट डेवलपर बने सिड किट्सन ने यहां एक अनोखा सपना देखा। उन्होंने 18,000 एकड़ जमीन खरीदी और एक ऐसे शहर की योजना बनाई, जो प्रकृति से लड़े नहीं, बल्कि उसके साथ जिए। शुरुआत में लोग उन्हें पागल कहते थे, लेकिन आज वही शहर दुनिया के लिए मिसाल बन चुका है।
पर्यावरण के साथ समझौता नहीं, बल्कि साझेदारी:
सिड किट्सन ने इतिहास में दर्ज होने वाला फैसला लिया। उन्होंने खरीदी गई जमीन का बड़ा हिस्सा फ्लोरिडा सरकार को संरक्षण के लिए वापस सौंप दिया, ताकि वहां कभी निर्माण न हो। शहर को बसाते समय एक भी पेड़ अनावश्यक रूप से नहीं काटा गया। जिन पेड़ों को हटाया गया, उन्हें शहर के पार्कों में दोबारा लगाया गया। आज बैबकॉक रैंच का करीब 50% हिस्सा हरियाली, झीलों और पार्कों के लिए सुरक्षित है।
6.5 लाख सोलर पैनल और अंडरग्राउंड बिजली नेटवर्क:
शहर की असली ताकत है इसका 700 एकड़ में फैला विशाल सोलर फार्म, जहां करीब 6.5 लाख सोलर पैनल लगे हैं। यह सोलर प्लांट 150 मेगावाट बिजली पैदा करता है, जो शहर की जरूरत से ज्यादा है। पूरी बिजली सप्लाई अंडरग्राउंड ग्रिड से होती है।
सड़कों पर कोई बिजली का खंभा नहीं:
अतिरिक्त बिजली को बड़ी बैटरियों में स्टोर किया जाता है।जरूरत पड़ने पर बैकअप के लिए नेचुरल गैस टर्बाइन भी मौजूद है। इसी वजह से यहां रहने वाले कई लोगों को बिजली कंपनी से बिल की बजाय क्रेडिट मिलता है।
250 किमी की रफ्तार वाले तूफान में भी नहीं गई बिजली:
साल 2022 में आए इयान तूफान ने फ्लोरिडा के कई शहरों को हफ्तों तक अंधेरे में डुबो दिया। 240–250 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चली हवाओं ने बिजली के खंभे और तार उखाड़ दिए। लेकिन बैबकॉक रैंच में एक भी बत्ती नहीं बुझी। यहां के निवासी बताते हैं“हमारे चारों ओर तबाही थी, लेकिन हमारे घरों में वाई-फाई चल रहा था और टीवी पर खबरें आ रही थीं।”अंडरग्राउंड बिजली लाइनें, मजबूत सोलर पैनल और स्मार्ट ग्रिड सिस्टम ने इस शहर को सच में ‘तूफान-प्रूफ’ बना दिया।
इलेक्ट्रिक शटल, कम गाड़ियां और जीरो-कार्बन लाइफस्टाइल:
बैबकॉक रैंच में लोग निजी गाड़ियों की बजाय इलेक्ट्रिक और सेल्फ-ड्राइविंग शटल का ज्यादा इस्तेमाल करते हैं। शहर के भीतर चलने वाली ये शटल बसें बिना ड्राइवर के चलती हैं। जो इलेक्ट्रिक व्हीकल्स को बढ़ावा, पैदल और साइकिल फ्रेंडली सड़कें, बारिश का पानी झीलों में स्टोर होने की व्यवस्था और घरों में स्मार्ट एनर्जी सेविंग सिस्टम हैं, यही वजह है कि यह शहर जीरो-कार्बन लाइफस्टाइल का बेहतरीन उदाहरण बन चुका है।
भविष्य के शहरों का ब्लूप्रिंट है बैबकॉक रैंच:
फिलहाल यहां करीब 7,000 लोग रहते हैं, लेकिन पूरी तरह विकसित होने पर यह शहर 50,000 लोगों का घर बनेगा। बैबकॉक रैंच यह साबित करता है कि आधुनिक सुविधाओं के लिए प्रकृति को नष्ट करना जरूरी नहीं। यह शहर साफ संदेश देता है। भविष्य सोलर है, स्मार्ट है और प्रकृति के साथ है।