अबू धाबी। UAE-India BrahMos Deal: भारत की सबसे घातक सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल 'ब्रह्मोस' (BrahMos) की धमक अब खाड़ी देशों (Middle East) में भी सुनाई देने वाली है। रक्षा क्षेत्र से आ रही बड़ी खबरों के मुताबिक, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) भारत से ब्रह्मोस मिसाइल खरीदने की तैयारी में है। इस संभावित रक्षा सौदे (UAE-India BrahMos Deal) ने न सिर्फ खाड़ी देशों में एक नई बहस छेड़ दी है, बल्कि पाकिस्तान और सऊदी अरब के सैन्य गलियारों में भी खलबली मचा दी है। सोशल मीडिया पर यूएई और सऊदी अरब के यूजर्स के बीच ब्रह्मोस की मारक क्षमता को लेकर तीखी बहस छिड़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह डील फाइनल होती है, तो इससे यूएई की सैन्य ताकत में अभूतपूर्व इजाफा होगा।
सऊदी-पाकिस्तान की 'सीक्रेट डील' का जवाब है यह सौदा?
दरअसल, इस रणनीतिक हलचल के पीछे खाड़ी देशों की हालिया जियोपॉलिटिक्स (भू-राजनीति) है। पिछले कुछ समय में सऊदी अरब और यूएई के रिश्तों में कड़वाहट देखी गई है। इसी बीच, सऊदी अरब ने पाकिस्तान के साथ एक बड़ा डिफेंस एग्रीमेंट किया था। इस समझौते के तहत प्रावधान है कि 'एक देश पर हमला, दूसरे देश पर हमला माना जाएगा'। सऊदी और पाकिस्तान की इस जुगलबंदी के बाद यूएई ने भी अपनी रणनीति बदली और भारत के साथ अपनी रणनीतिक साझेदारी (Strategic Partnership) को तेजी से आगे बढ़ाया। इसी कड़ी में अब 'ब्रह्मोस मिसाइल' सौदे को लेकर बातचीत अंतिम दौर में मानी जा रही है।
ब्रह्मोस का नाम सुनते ही क्यों कांपता है पाकिस्तान?
पाकिस्तान को ब्रह्मोस मिसाइल की मारक क्षमता और अचूक निशाने का अच्छे से अंदाजा है। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार:
ऑपरेशन सिंदूर का खौफ: भारत ने 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान ब्रह्मोस मिसाइल के जरिये पाकिस्तान के 11 प्रमुख एयरबेसों को भारी नुकसान पहुंचाया था।
चीनी एयर डिफेंस फेल: पाकिस्तान के पास मौजूद चीन के एडवांस एयर डिफेंस सिस्टम भी ब्रह्मोस की रफ्तार को ट्रैक या इंटरसेप्ट (रोकने) करने में पूरी तरह नाकाम साबित हुए थे।
पाकिस्तान को इन एयरबेसों की मरम्मत करने में 6 महीने से लेकर 1 साल तक का समय लग गया था। यही वजह है कि यूएई के पास इस मिसाइल के जाने की खबर से इस्लामाबाद की नींद उड़ी हुई है।
रक्षा साझेदारियों में 'विविधता' ला रहा है UAE
यूएई इस समय अपनी रक्षा जरूरतों के लिए किसी एक देश पर निर्भर नहीं रहना चाहता। वह अपने 'डिफेंस पोर्टफोलियो' को लगातार डायवर्सिफाई कर रहा है।UAE का मौजूदा डिफेंस नेटवर्क: यूएई पहले से ही अमेरिका, यूरोप, दक्षिण कोरिया और इजरायल जैसे देशों के अत्याधुनिक मिलिट्री सिस्टम और हथियारों का इस्तेमाल कर रहा है। अब इस लिस्ट में भारत की ब्रह्मोस मिसाइल का जुड़ना यूएई की सेना को एक ऐसा 'ब्रह्मास्त्र' दे देगा, जिससे उसकी सुरक्षा की गारंटी कई गुना बढ़ जाएगी। इस मिसाइल के आने के बाद सऊदी अरब तो क्या, उसे सुरक्षा का भरोसा देने वाला पाकिस्तान भी यूएई की तरफ आंख उठाने से पहले सौ बार सोचेगा।