यूरोप इन दिनों भीषण गर्मी की चपेट में है, जहां कई देशों में तापमान ने पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। फ्रांस, स्पेन, ब्रिटेन और इटली समेत कई देशों में गर्मी का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है। फ्रांस में लू से जुड़ी घटनाओं में कम से कम 18 लोगों की मौत की खबर है, जबकि कई शहरों में स्कूलों के संचालन पर भी असर पड़ा है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण यूरोप में तापमान सामान्य से कहीं अधिक दर्ज किया जा रहा है।
फ्रांस और स्पेन में रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा पारा
फ्रांस के कई शहरों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया। बोर्डो में 41.9 डिग्री सेल्सियस और पोइटियर्स में 41.2 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया, जिसने दशकों पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए। वहीं स्पेन के उत्तरी हिस्सों में भी असामान्य गर्मी देखी गई, जहां तापमान सामान्य औसत से काफी अधिक रहा। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, यह स्थिति यूरोप के लिए चिंताजनक संकेत है।
गर्म कार में मिले दो बच्चों के शव
दक्षिण-पूर्वी फ्रांस में एक दर्दनाक घटना में दो छोटे बच्चों की मौत हो गई। दोनों बच्चे एक कार के अंदर बेहोश अवस्था में मिले, जिन्हें बचाने की कोशिश नाकाम रही। अधिकारियों के मुताबिक, अत्यधिक गर्मी के कारण यह हादसा हुआ। इसके अलावा कई बुजुर्गों की भी लू से संबंधित स्वास्थ्य समस्याओं के चलते जान चली गई।
गर्मी से बचने की कोशिश में बढ़े हादसे
भीषण तापमान के कारण लोग राहत पाने के लिए जलाशयों और नदियों का रुख कर रहे हैं। फ्रांस में हाल के दिनों में डूबने की घटनाओं में भी वृद्धि दर्ज की गई है। आपदा प्रबंधन एजेंसियों ने लोगों से केवल सुरक्षित और निगरानी वाले स्थानों पर ही तैराकी करने की अपील की है।
ब्रिटेन में भी टूट सकता है जून का रिकॉर्ड
ब्रिटेन की मौसम एजेंसी ने चेतावनी दी है कि आने वाले दिनों में तापमान 39 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। यदि ऐसा होता है तो जून महीने का कई दशक पुराना रिकॉर्ड टूट जाएगा। विशेषज्ञों का कहना है कि हाल के वर्षों में ब्रिटेन में गर्मी की तीव्रता लगातार बढ़ी है।
इटली और अन्य देशों में अलर्ट जारी
इटली ने कई प्रमुख शहरों में हीटवेव अलर्ट जारी किया है। बढ़ती बिजली खपत के कारण कुछ इलाकों में बिजली आपूर्ति भी प्रभावित हुई है। वहीं बेल्जियम में वन्यजीव संरक्षण संगठनों ने बताया कि अत्यधिक गर्मी का असर पक्षियों और अन्य जीवों पर भी पड़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण भविष्य में ऐसी चरम मौसमीय घटनाएं और अधिक गंभीर हो सकती हैं।