राहुल यादव, उज्जैन: साइबर ठगों ने सीबीआई अधिकारी बनकर सेना के एक सेवानिवृत्त अधिकारी और उनकी पत्नी को 24 घंटे तक डिजिटल अरेस्ट में रखा। ठगों ने मनी लॉन्ड्रिंग और बॉम्बे हाईकोर्ट से वारंट निकलने का डर दिखाकर तीन लाख रुपये की मांग की। हालांकि बैंक अधिकारी और पुलिस की सतर्कता से समय रहते बड़ा साइबर फ्रॉड टल गया।
गिरफ्तारी वारंट का दिया डर
जानकारी के अनुसार ग्राम लेकोडा निवासी सेना से रिटायर्ड लेफ्टिनेंट कर्नल गंगाराम वर्मा (83 वर्ष) और उनकी पत्नी को मंगलवार को ठगों ने कॉल किया। कॉल करने वालों ने खुद को सीबीआई अधिकारी बताते हुए कहा कि उनके नाम की सिम का इस्तेमाल मनी लॉन्ड्रिंग में हुआ है और बॉम्बे हाईकोर्ट से गिरफ्तारी वारंट जारी हो चुका है। ठग लगातार वीडियो कॉल कर मिनिस्ट्री के आदेश का हवाला देते रहे और किसी को भी जानकारी न देने की सख्त हिदायत दी। गिरफ्तारी के डर से दंपति मानसिक दबाव में आ गए और किसी को कुछ नहीं बताया।
पैसा ट्रांसफर करने पहुंचे बैंक
बुधवार को लेफ्टिनेंट कर्नल वर्मा नई सड़क स्थित भारतीय स्टेट बैंक में बताए गए खाते में आरटीजीएस के जरिए तीन लाख रुपये ट्रांसफर करने पहुंचे। बैंक में उनकी घबराहट और लगातार आ रहे कॉल को देखकर सीनियर एसोसिएट प्रियांक को शक हुआ। पूछताछ करने पर भी वर्मा कुछ बताने को तैयार नहीं थे और जल्दी से ट्रांजैक्शन कराने पर जोर दे रहे थे।
बैंक अधिकारी को हुआ शक
शंका होने पर बैंक अधिकारी ने खाचरोद एसडीओपी आकांक्षा को जानकारी दी। इसके बाद सीएसपी राहुल देशमुख और दीपिका शिंदे बैंक पहुंचे। पुलिस अधिकारियों ने करीब एक घंटे तक वर्मा को विश्वास में लेकर उनका मोबाइल चेक किया और पूरे मामले को साइबर फ्रॉड बताया। इसके बाद समय रहते रुपए ट्रांसफर रुकवा दिए गए।