भोपाल : मध्य प्रदेश के रायसेन में आयोजित "उन्नत कृषि महोत्सव " का आज समापन होने जा रहा है। जिसमे शामिल होने के लिए केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी जहां भोपाल पहुंच गए है। तो वही कार्यक्रम का हिस्सा बनने के लिए जीतू पटवारी भी रायसेन जाना चाहते थे। लेकिन पुलिसकर्मियों ने उन्हें बीच में ही रोक दिया। हालांकि इस दौरान पटवारी ने उन्हें समझने का प्रयास किया। लेकिन राज्य सरकार के प्रभाव के कारण उन्हें आगे जाने नहीं दिया गया।
मध्य प्रदेश में भाजपा का राज है या तालिबान का ?
इधर, बीजेपी सरकार द्वारा की जा रही मनमानी पर भड़कते हुए जीतू पटवारी ने कहा कि मध्य प्रदेश में भाजपा का राज है या तालिबान का? एक किसान पुत्र को मेले में जाने से रोका जा रहा है। संविधान के अनुच्छेद 19 (1) (d) के तहत भारत के किसी भी नागरिक को एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाने का अधिकार है। लेकिन मोहन यादव जी के राज में संविधान तार-तार किया जा रहा है। पूरे प्रदेश के किसान देख रहे हैं कि कैसे किसान के बेटे को पुलिस बल लगाकर रोका जा रहा है।
भाजपा ने डर के कारण मेरा रास्ता रोका
पटवारी ने आगे कहा कि भाजपा ने डर के कारण सैकड़ों पुलिस बल तैनात कर मेरा रास्ता रोक दिया है। में तो बस शिवराज सिंह चौहान जी द्वारा आयोजित कृषि मेले में कृषक उपकरणों के बारे में जानने के लिए रायसेन जाना चाहता था। ताकि आधुनिक खेती की नई तकनीकें, उन्नत बीज और उपकरण देखें सके और किसानों के बीच उनका प्रचार-प्रसार कर सके।
पुलिसकर्मियों से हुई काफी बहस
कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि “प्रदेश में ‘किसान कल्याण वर्ष’ मनाया जा रहा है लेकिन एक किसान के बेटे को ही कृषि मेले में जाने से रोका जा रहा है। यह सरकार की मंशा और नीतियों पर बड़ा सवाल है।” पत्रकार वार्ता में उन्होंने बताया कि जब वे रायसेन के लिए रवाना हुए तो उन्हें रोकने के लिए भोपाल में वाटर कैनन के साथ बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात मिला। पुलिसकर्मियों से काफी बहस करने के बावजूद उन्हें आगे नहीं जाने दिया गया।
सरकार नहीं चाहती कि वे मेले में जाएं
जबकी उन्होंने पहले ही प्रशासन को पत्र लिखकर मेले में शामिल होने की अनुमति मांगी थी और यह स्पष्ट किया था कि वे अकेले जाकर शांतिपूर्वक तरह से कार्यक्रम में भाग लेना चाहते हैं। लेकिन आज ADG स्तर से फोन आया और साफ कहा गया कि सरकार नहीं चाहती कि वे मेले में जाएं। जिसकी वजह से उन्हें बीच रास्ते से वापस लौटना पड़ा।