मुकेश प्रजापति,भैरूंदा: स्वास्थ्य विभाग अपनी वाहवाही लूटने और कागजी आंकड़े सुधारने के चक्कर में किस हद तक जा सकता है, इसका ताजा उदाहरण रेहटी तहसील के ग्राम मरदानपुर में देखने को मिला है। यहाँ लाखों की लागत से बने आयुष्मान आरोग्य मंदिर का लोकार्पण तो बड़े धूमधाम से कर दिया गया, लेकिन हकीकत यह है कि अस्पताल का भवन अभी तक पूरी तरह तैयार ही नहीं हुआ है।
98 लाख का बजट, फिर भी काम अधूरा
ग्राम मरदानपुर में करीब 98 लाख रुपये की लागत से इस नए भवन का निर्माण किया गया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि निर्माण कार्य न केवल अधूरा है, बल्कि उसकी गुणवत्ता भी बेहद घटिया है। भवन के लोकार्पण को कई दिन बीत चुके हैं, लेकिन यहाँ न तो मरीजों के बैठने के लिए फर्नीचर है और न ही स्टाफ की तैनाती की गई है। उद्घाटन के बाद से ही इस भवन पर ताला लटका हुआ है, जिससे आसपास के 15 गाँवों के ग्रामीण खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।
दिग्गज नेताओं को रखा धोखे में!
हैरानी की बात यह है कि इस आधे-अधूरे भवन का लोकार्पण क्षेत्रीय विधायक रमाकांत भार्गव और युवा नेता कार्तिकेय सिंह चौहान के हाथों करवा दिया गया। सूत्रों का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने नेताओं को भवन की वास्तविक स्थिति और हैंडओवर की प्रक्रिया पूरी न होने की जानकारी ही नहीं दी। नियमों के मुताबिक, बिना एनओसी (NOC) और हैंडओवर के किसी भी सरकारी भवन का लोकार्पण नहीं किया जा सकता, लेकिन यहाँ नियमों को ताक पर रख दिया गया।
जनता में आक्रोश, जिम्मेदार दे रहे दलीलें
मरदानपुर के सरपंच जीतू मालवीय और स्थानीय निवासियों का कहना है कि मरदानपुर स्वास्थ्य का मुख्य केंद्र है जहाँ 15 गाँवों के लोग इलाज के लिए आते हैं। लोकार्पण के बाद भी सुविधा न मिलना सीधे तौर पर जनता के साथ छलावा है।
क्या कहते है अधिकारी?
डॉ. डी. बड़ोदिया (बीएमओ, बुधनी): अभी फर्नीचर का काम बाकी है, जिसे जल्द पूरा करवाकर अस्पताल शुरू किया जाएगा।
डॉ. कंचन (प्रभारी): भवन अभी हमें हैंडओवर नहीं हुआ है।