भोपाल। मध्य प्रदेश में मूंग की 100 प्रतिशत सरकारी खरीदी और ई-टोकन व्यवस्था समाप्त करने की मांग को लेकर किसानों का आंदोलन तेज हो गया है। संयुक्त किसान मोर्चा के नेतृत्व में प्रदेश के विभिन्न जिलों से पहुंचे करीब दो हजार किसानों ने राजधानी भोपाल में डेरा डाल दिया है। प्रशासन के साथ देर रात तक चली बातचीत बेनतीजा रहने के बाद किसानों ने मुख्यमंत्री आवास (सीएम हाउस) का घेराव करने का ऐलान कर दिया है।
प्रशासन से वार्ता विफल, किसान अड़े मांगों पर
किसान प्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच करीब एक घंटे तक चर्चा हुई। प्रशासन ने आंदोलन समाप्त कर सरकार को एक सप्ताह का समय देने का प्रस्ताव रखा, लेकिन किसान संगठनों ने इसे अस्वीकार कर दिया। उनका कहना है कि जब तक सरकार मूंग की पूरी उपज की सरकारी खरीदी सुनिश्चित करने और ई-टोकन व्यवस्था समाप्त करने का निर्णय नहीं लेती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। किसान नेताओं का आरोप है कि कई बार मुख्यमंत्री से बातचीत का आश्वासन मिला, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला। ऐसे में किसानों ने सीधे मुख्यमंत्री आवास तक मार्च निकालने का निर्णय लिया है।
भोपाल में सुरक्षा के कड़े इंतजाम
आंदोलन को देखते हुए राजधानी में पुलिस प्रशासन पूरी तरह अलर्ट है। मुख्यमंत्री आवास की ओर बढ़ रहे किसानों को वीर सावरकर सेतु के पास सीएसआईआर-एएमपीआरआई (CSIR-AMPRI) के सामने रोक दिया गया। पुलिस ने कई स्थानों पर बैरिकेडिंग की है, सड़क पर बसें खड़ी कर मार्ग बंद किया गया है और वाटर कैनन भी तैनात किए गए हैं। अधिकारियों के अनुसार, किसी भी अप्रिय स्थिति से बचने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है और यही क्षेत्र अंतिम सुरक्षा घेरा बनाया गया है।
यातायात व्यवस्था प्रभावित
किसान आंदोलन का असर भोपाल की यातायात व्यवस्था पर भी देखने को मिला। नर्मदापुरम रोड सहित कई प्रमुख मार्गों पर ट्रैफिक डायवर्ट किया गया, जिससे होशंगाबाद रोड, एम्स क्षेत्र, बंसल प्लाजा, कटारा हिल्स और आसपास के इलाकों में लंबा जाम लग गया। वाहन चालकों को वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करना पड़ा। कई स्थानों पर वाहनों की लंबी कतारें देखने को मिलीं। ट्रैफिक प्रभावित होने के कारण कुछ स्कूलों ने एहतियात के तौर पर अवकाश भी घोषित कर दिया।
अब सरकार के फैसले पर टिकी निगाहें
फिलहाल किसान और प्रशासन आमने-सामने हैं, लेकिन आंदोलन शांतिपूर्ण बना हुआ है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि सरकार किसानों की मांगों पर क्या फैसला लेती है और मुख्यमंत्री आवास घेराव के दौरान स्थिति किस दिशा में आगे बढ़ती है।